ओडिशा ने ठुकराया, नौरादेही ने अपनाया: बाघिन राधा बनी 24 बाघों की मां
ओडिशा ने जिस बाघिन को टकराया उसने ही आबाद किया नौरादेही अभयारण्य को उससे बढ़ा 24 से ज्यादा बाघों का कुनबा बाघिन राधा बनी मदर ऑफ
नौरादेही अभयारण्य में टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट का तमगा दिलाने वाली बाघिन राधा की रोचक कहानी
ओडिशा के संदीप और नौरादेही अभयारण्य के प्रदीप है मौसेरे भाई एक ने मना किया तो दूसरे ने कहा हमें दे दो – जहरखुरानी को मात देकर बसाया 24 बाघों का कुनबा
विशाल रजक तेंदूखेड़ा!- मप्र के पेंच टाइगर रिजर्व में पॉइजन की शिकार जिस बाघिन को ओडिशा वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों ने लेने से मना किया उसने ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को बाघों से आबाद किया वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में टाइगर प्रोजेक्ट को 8 साल पूरे हो गए 18 अप्रैल 2018 को ही कान्हा टाइगर रिजर्व में पली-बढ़ी पेंच की बाधिन राधा एन-1 को पहली बार नौरादेही में शिफ्ट किया गया था। वर्तमान में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में वयस्क बाघों की संख्या 24 से 30 के बीच है। बाघों के आने के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों को लाने की भी तैयारी चल रही है। इसके लिए मुहली रेंज में 600 हेक्टेयर में आठ बाड़े बनाए जा रहे हैं। पहली खेप में चार चीते नौरादेही आ सकते हैं। बाघों की शिफ्टिंग के आठ साल पूरे होने पर हमारे संवाददाता विशाल रजक ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह से नौरादेही में टाइगर शिफ्टिंग की पूरी कहानी जानी।
2018 की एक मीटिंग में फैसला
ओडिशा में दो टाइगर शिफ्ट करने के लिए जनवरी 2018 में भोपाल में जो मीटिंग हो रही थी उसमें नौरादेही के एसडीओ प्रदीप त्रिपाठी भी थे। उन्होंने घुरेला एनक्लोजर में पल रही वयस्क बाघिन को नौरादेही में शिफ्ट करने की बात कही। उन्होंने कहा कि नौरादेही से गांव की शिफ्टिंग 2013-14 में शुरू हो गई है। ओडिशा के फॉरेस्ट अधिकारी संदीप त्रिपाठी ने जिस कान्हा में पल रही जिस बाघिन को लेने से इंकार कर दिया है वह नौरादेही में शिफ्ट कर दीजिए और उसी जनवरी-2018 में उसी मीटिंग में निर्णय हुआ कि कान्हा से बाधिन को नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा 18 अप्रैल 2018 को पेंच की पॉइजन की शिकार फीमेल टाइगर वाया कान्हा के एनक्लोजर से होते हुए नौरादेही आई और इसे यहां नाम मिला एन-1 राधा। एक मेल टाइगर 30 अप्रैल 2018 को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से नौरादेही शिफ्ट किया गया। इसे नाम मिला एन-2 किशन। रोचक बात ये ही कि उड़ीसा के फॉरेस्ट ऑफिसर संदीप त्रिपाठी और नौरादेही के तत्कालीन एसडीओ प्रदीप त्रिपाठी मौसेरे भाई है नौरादेही में अब तक 7 टाइगर शिफ्ट किए जा चुके हैं। इनमें से एक की मौत हुई है
घुरेला एनक्लोजर में पले बाघों को दो बार जंगल में छोड़ा
2005 से 2010 के बीच एक बार ये प्रैक्टिकल किया जा चुका था। जो शावक घुरेला एनक्लोजर में रहे थे उन्हें पन्ना टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। पन्ना टाइगर रिजर्व के टी-4 और टी-5 बाधिन भी घुरेला एनक्लोजर में पले-बढ़े हैं। ये पन्ना के फरिस्ट एरिया में अच्छे से रहे इनके शावक भी हुए और बाद में उनकी डेथ हो गई। 2013 में कान्हा के घुरेला एनक्लोजर में फिर एक बार बच्चों को पाला गया। उनको भी जंगल में छोड़ा गया लेकिन टेरिटरी फाइट में उनकी डेथ हो गई। घुरेला एनक्लोजर में शावक को सब कुछ सिखा सकते हैं लेकिन लड़ना नहीं सिखा सकते क्योंकि वहां दूसरा टाइगर नहीं होता है। इसलिए यहां पले शावकों को हमेशा एलेसी जगह छोड़ा जाता है जहां टाइगर की संख्या कम हो
ओडिशा को थी जहरखुरानी में बची बाधिन से कुनबा न बढ़ने की आशंका
डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि ओडिशा में महानदी के किनारे स्थित सतकोसिया टाइगर रिजर्व में टाइगर शिफ्ट किए जाने थे। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मप्र से एक जोड़ी टाइगर ओडिशा भेजने की अनुमति दे दी ओडिशा के फॉरेस्ट ऑफिसर आए और भोपाल में मीटिंग में हुई। मप्र के फॉरेस्ट अधिकारियों ने कहा कि घुरेला एनक्लोजर में पल रही बाधिन नाला टाइगर की शावक जो अब दो साल की हो गई है इसे ओडिशा को दे देंगे लेकिन ये पहले पेंच में पॉइजन की शिकार हो चुकी थी इसलिए ओडिशा के संदीप त्रिपाठी ने लेने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि हमें दो स्वस्थ्य टाइगर दो मीटिंग में निर्णय हुआ कि सतकोसिया के लिए बांधवगढ़ से एक फीमेल और कान्हा से एक मेल टाइगर जाएगा जो जून 2018 में मप्र से ओडिशा शिफ्ट हुए
बाघिन राधा ने दिलाई टाइगर रिजर्व की पहचान
बाघिन राधा ने पहली बार मई 2019 में तीन शावकों को जन्म दिया इनमें दो बाघिन व एक बाघ है राधा से पहली बार में जन्मी उसकी दो बेटी एन -111 और एन-112 मां बनीं तो राधा ने तीसरी पीढ़ी देख ली जून 2023 ये बाघ किशन की ओर बाहर से आए बाघ एन-3 के बीच टेरिटरी को लेकर हुए संघर्ष में मौत हो गई किशन और राधा की बेटियां टाइगर रिजर्व को बाघों से आबाद कर रही है जब नौरादेही अभयारण्य हुआ करता था उस समय यहां पर गिने चुने ही पर्यटक आते थे लेकिन जब 2023 में नौरादेही से टाइगर रिजर्व में तब्दील किया गया तब से यहां पर पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है यानी नौरादेही अभयारण्य को टाइगर रिजर्व का तमगा दिलाने में बाघिन राधा की अहम भूमिका है साथ ही बाघिन राधा से भी टाइगर रिजर्व में लगातार कुनबा बढ़ रहा है वर्तमान में टाइगर रिजर्व में 26-30 बाघ होने का दावा किया जा रहा है इसमें 22 बाघ बाघिन राधा और उसकी दो बेटियों से जन्में है
जहरीली पानी पीने से हुई थी मौत केवल राधा जिंदा बच पाई थी
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि अप्रैल 2016 तब में पेंच टाइगर रिजर्व में पदस्थ था। वहां की मशहूर फीमेल टाइगर थी जिसका नाम था बाधिन नाला। एक जलस्रोत से बाधिन और उसके शावकों ने पानी पिया। जहरीले पदार्थ होने से टाइगर बाघिन नाला की मौत हो गई। तीन शावकों में से एक की मौत हो गई। दो का रेस्क्यू किया गया। इनमें से भी एक की एक-दो दिन बाद मौत हो गई सिर्फ एक फीमेल शावक बची। इसे कान्हा में बने घुरेला एनक्लोजर में छोड़ा। वहीं पाला गया। घुरेला में 35 हेक्टेयर का एनक्लोजर है। 7 हेक्टेयर का छोटा एनक्लोजर है जिसमें टाइगर के शावक रहते हैं और 35 हेक्टेयर के अन्य हिस्से में चीतल व अन्य वन्य जीव रख जाते हैं ताकि वे शिकार सीख जाएं








