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विधवा विवाह की सजा ? दंपत्ति का सामाजिक बहिष्कार, न्याय के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे

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विधवा विवाह की सजा ? दंपत्ति का सामाजिक बहिष्कार, न्याय के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे

सागर जिले में समाज की रूढ़िवादी परंपराओं पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है, जहां विधवा विवाह करने वाले एक दंपत्ति को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित दंपत्ति मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचा और पूरे मामले की लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई।

जानकारी के अनुसार, ग्राम चितौरा निवासी राजेंद्र पटेल ने लगभग 8 माह पहले मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत एक विधवा महिला से विवाह किया था। विवाह के बाद उन्होंने महिला के साथ उसकी छोटी बच्ची को भी अपनाकर नया परिवार बसाया।

दंपत्ति का आरोप है कि विवाह के बाद गांव के कुछ लोगों और समाज के कथित मुखिया ने उन्हें सामाजिक मान्यता देने के नाम पर “कच्चा-पक्का भोजन” कराने की शर्त रखी। इस परंपरा को स्वीकार करने से इनकार करने पर उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुना दिया गया।

पीड़ितों के अनुसार, बहिष्कार केवल उनके गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के सीमावर्ती गांवों में भी उन्हें अलग-थलग कर दिया गया है। बच्ची को अन्य बच्चों के साथ खेलने से रोका जा रहा है और परिवार को किसी भी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाता। इससे परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से गहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है। दंपत्ति का कहना है कि समाज के कुछ अन्य लोगों द्वारा भी इस निर्णय का समर्थन किया जा रहा है, जिससे दबाव और बढ़ गया है। लगातार हो रहे बहिष्कार और प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन से हस्तक्षेप और सुरक्षा की मांग की है।

पीड़ित दंपत्ति ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाने की गुहार लगाई है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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