भीषण गर्मी में दोपहर को थमा जनजीवन, तेंदूपत्ता बना ग्रामीणों की आजीविका का सहारा
दमोह/तेंदूखेड़ा। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में इन दिनों भीषण गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। दोपहर के समय सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है, वहीं शाम ढलते ही सूर्य की तपिश कम होते ही लोगों का आवागमन तेजी से बढ़ने लगता है। लोग आवश्यक कार्यों के लिए घरों से बाहर निकलते हैं और बाजारों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगती है।
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ठंडे पेय पदार्थों, फलों एवं अन्य शीतल वस्तुओं का अधिक उपयोग कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मजदूर वर्ग के लोग इस मौसम में मजदूरी की अपेक्षा तेंदूपत्ता तोड़ने के कार्य को प्राथमिकता दे रहे हैं। जंगलों में इन दिनों तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य जोर-शोर से चल रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आय का प्रमुख साधन मिल रहा है।
ग्राम क्षेत्र के कल्याण सिंह, रश्मि केवट एवं बिंदी बाई ने बताया कि वे लोग सुबह जल्दी उठकर जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए निकल जाते हैं और सुबह 10 बजे तक वापस घर लौट आते हैं। इसके बाद दोपहर की भीषण गर्मी में घरों में रहकर तेंदूपत्तों की गड्डियों का संधारण एवं बांधने का कार्य करते हैं। शाम के समय तापमान कम होने पर फिर से आवश्यक कार्यों में जुट जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जंगलों में उपलब्ध वन औषधियां भी उनके रोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन रही हैं। कई लोग जंगलों से जड़ी-बूटियां एवं अन्य वन उत्पाद एकत्र कर बाजारों में बेच रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। भीषण गर्मी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने परिश्रम और संसाधनों के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी का प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। प्रशासन द्वारा भी लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जा रही








