बेपटरी हुई यातायात व्यवस्था ने बढ़ाई मुसीबत हर दिन नगर में लगता है जाम लेकिन तेंदूखेड़ा पुलिस प्रशासन हमेशा रहता है गायब
मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण व बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन ट्रैफिक में बन रहे बांधा
रिपोर्ट – विशाल रजक
तेंदूखेड़ा। बेपटरी हो चुकी यातायात व्यवस्था का सबसे बड़ा असर नगर के बाजार क्षेत्र पर पड़ रहा है। पहले जहां मुख्य मार्ग व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था तो वहीं अब यहां अतिक्रमण के कारण सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है जिसके कारण लोग मुख्य सड़क बाजार से कम, अन्य दुकानों से सामान खरीदते हैं जाम से परेशान होकर ग्राहक अब सड़क पार करने से कतराने लगे हैं। जहां एक ओर व्यापारिक प्रतिष्तान बढ़ गए हैं तो वहीं दूसरी ओर खकरिया रोड के सकरे एवं जाम से भरपूर होने के हैं कारण लोग अब वहां खरीदारी के बजाय वैकल्पिक मार्गों पर जाने लगे दरअसल नगर परिषद द्वारा दी गई दुकानों की सीमा से बाहर जाकर अधिकांश व्यापारियों ने अपनी दुकानें बढ़ा ली हैं। वे सड़क तक अस्थाई शो केस और सामान रखकर दुकान का विस्तार कर लेते हैं हैं और जो व्यापारी विस्तार नहीं किए हुए हैं, वह अपनी दुकान के सामने हाथठेले की दुकाने लगवा लेते हैं। ऐसे व्यापारी, ठेला वालों से हर दिन राशि वसूलते हैं। जिससे सड़क पर चलने के लिए जगह नहीं बचती है। नगर की यातायात व्यवस्था अब तक नहीं सुधरी है। जहां देखो वहां जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। नगर में अतिक्रमण व अव्यवस्थित यातायात से नगरवासी काफी परेशान हैं
मंडी मार्ग पर किसानों और रहवासियों को दिक्कत
सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना जनपद पंचायत मार्ग पर रहने वाले लोगों को करना पड़ रहा हैं इस मार्ग पर सबसे ज्यादा जाम के हालात बनते हैं। क्योंकि इस मार्ग पर कृषि मंडी के कारण आए दिन दर्जनों ट्रक, कंटेनर, किसानों के ट्रैक्टर ट्राली व अन्य वाहन निकलने से जाम लगा रहता है। क्योंकि यह मार्ग पूरी तरह से सिंगल हैं साथ ही सभी सरकारी विभागों के कार्यालय बने हुए हैं। जिसके कारण अधिकारी और जनप्रतिनिधि के वाहन भी जाम में फंस जाते हैं।
सड़कों में वाहन खड़ा करने में हो रही मनमानी
नगर विभिन्न वार्डों में सड़कों पर वाहन खड़े रहने से मार्ग बाधित रहते हैं। यहां तक कि मुख्य मार्ग पर भी लोग अपनी बाइक, कार, ट्रक, यात्री बस प्रतिष्ठानों के सामने खड़े कर देते हैं। जिससे यातायात के साथ ही नगर की व्यवस्था बिगड़ रही है। जो लोग मुख्य मार्ग एवं अन्य मार्गों पर वाहन खड़ा करते हैं, उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है कि उनके वाहन खड़े करने से मार्ग से गुजरने वाले अन्य लोगों को परेशानी होती है और ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ जाती है
अतिक्रमण से 50 फीट का मार्ग 20 का रह जाता है
तहसील कार्यालय से लेकर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय तक मुख्य मार्ग लगभग 50 फीट चौड़ा है, लेकिन दिन में ये 20 फीट ही बचता है। क्योंकि मार्ग के दोनों ओर हाथ ठेले व बड़े वाहन खड़े रहते हैं। जिसके कारण सकरा बना रहता है इसके अलावा मुख्य मार्ग से नगर में जाने वाली सड़कों पर भी अव्यवस्थित वाहन खड़े रहते हैं। साथ ही हाथ ठेले वाले भी सड़क पर आ गए हैं। जिससे मार्ग से गुजरने वाले अन्य वाहन चालकों को परेशानी होती है। नगर के भटरिया मार्ग की भी हालत बेहद खराब है। उधर बैंकों के सामने तो वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। गौर करने वाली बात ये हैं कि बदहाल ट्रैफिक सुधारने के लिए नगर वासी लगातार मांग करते आ रहे हैं, पर जिम्मेदार है कि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे अब लोगों में शासन-प्रशासन के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है

पुलिस प्रशासन कर रहा बड़े हादसे का इंतजार
पुलिस प्रशासन द्वारा इस और कोई कार्रवाई नहीं करने से कहीं न कहीं अधिकारी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे तब कहीं जाकर इस और ध्यान दिया जाएगा नगर के लोगों का आरोप है कि नगर की सड़कों पर कभी भी पुलिस नजर नहीं आती है ना ही थाना प्रभारी नगर भ्रमण पर निकलते हैं जिसके कारण चारों ओर सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है और लोग अपनी मनमानी अनुसार सड़कों पर व्यापार है नगर में किसी दिन कोई बड़ी घटना घटित हो जाएगी तब कहीं जाकर पुलिस गश्ती करेंगी और थाना प्रभारी सहित पुलिस स्टाफ सड़कों की व्यवस्थाओं को सुधारने निकलेंगे

थाना प्रभारी ने बिना जवाब दिए फोन काटा
इस संबंध में जब तेंदूखेड़ा थाना प्रभारी रावेंद्र बागरी से बात करने के लिए फोन लगाई गई तो उन्होंने रिसीव किया लेकिन जैसे ही नगर की यातायात व्यवस्था को लेकर बात की तो उन्होंने फोन काट दिया जब दोबारा से फोन किया तो फोन नहीं उठाया गया इसके पहले भी अनेक मामलों को लेकर थाना प्रभारी से बात करने का प्रयास किया जाता है तो थाना प्रभारी रावेंद्र बागरी द्वारा फोन रिसीव करके और मामले को सुनकर फोन काट दिया जाता है उस पर थाना प्रभारी द्वारा कोई जवाब नहीं दिया जाता है जिससे प्रतीत होता है थाना प्रभारी द्वारा नगर की व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है इसलिए वो कभी भी नगर भ्रमण पर नहीं निकलते हैं








