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आदिवासी परिवार की जमीन पर कब्जे का आरोप, न्याय की गुहार लेकर प्रशासन के दरवाजे पहुंचे पीड़ित

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आदिवासी परिवार की जमीन पर कब्जे का आरोप, न्याय की गुहार लेकर प्रशासन के दरवाजे पहुंचे पीड़ित

तेंदूखेड़ा। मंगलवार को जिला कलेक्टर के नाम एसडीएम के द्वारा नायब तहसीलदार चंद्रशेखर शिल्पी को सौपा गया है जिसमै उल्लेख किया गया है कि तहसील  अंतर्गत ग्राम तेदूखेड़ा निवासी आदिवासी परिवार ने अपनी पैतृक भूमि पर कथित अवैध कब्जा एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पक्ष द्वारा जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को आवेदन प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच एवं न्याय की मांग की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती कौशल्या मेमार पति जगदीश मेमार तथा धन्तोबाई पिता स्व. वालचंद साकिन, निवासी ग्राम तेदूखेड़ा, की भूमि तहसील कार्यालय के समीप स्थित है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना उनकी भूमि पर भवन निर्माण कार्य कराया जा रहा है। परिवार का कहना है कि संबंधित भूमि खसरा नंबर 170 में दर्ज है तथा उक्त भूमि उनके वैधानिक स्वामित्व में है। पीड़ितों के अनुसार, इस संबंध में कई बार प्रशासन को लिखित शिकायतें एवं आवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा बिना विधिक प्रक्रिया पूर्ण किए निर्माण कार्य को संरक्षण दिया जा रहा है। परिवार का कहना है कि उनके पास भूमि से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज एवं अभिलेख उपलब्ध हैं, इसके बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। मामले में एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि खसरा नंबर 166, जो धन्तो बाई के पिता स्वर्गीय वालचंद के नाम दर्ज था, उसकी मृत्यु के कई वर्षों बाद भूमि की रजिस्ट्री कैसे की गई, यह जांच का विषय है। पीड़ित पक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार का यह भी कहना है कि वर्ष 1988-89 से लेकर वर्तमान तक तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय एवं उप पंजीयक कार्यालय में भूमि से संबंधित अभिलेखों में कई बार नामांतरण एवं दस्तावेजी कार्यवाही की गई। अंतिम दान पत्र जुलाई 2023 में जारी किया गया, जिसमें भी कथित रूप से त्रुटियां बताई जा रही हैं। परिवार ने आरोप लगाया है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। बताया गया है कि मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़ित पक्ष ने जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से मांग की है कि 15 दिवस में संपूर्ण प्रकरण की सूक्ष्म एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा संबंधित भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए ताकि आदिवासी परिवार को न्याय मिल सके। ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से पारदर्शी जांच एवं पीड़ित परिवार को संरक्षण प्रदान करने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में श्रीमती कौशल्या मेमार, श्रीकांत पोरते, नोनेलाल परस्ते, हेमराज सिंह ,संदीप ,भारती ,मनीष ,जमुना चरण सिंह, भरे ,सावित्री ,जयराम सहित अन्य लोग समिम्लत थे

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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