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16 वर्षों की अथक मेहनत से तैयार की हरित वाटिका, पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरणादायी संदेश

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16 वर्षों की अथक मेहनत से तैयार की हरित वाटिका, पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरणादायी संदेश

तेंदूखेड़ा। प्रकृति के प्रति समर्पण, दृढ़ इच्छाशक्ति और सतत परिश्रम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नगर के वार्ड क्रमांक 8 निवासी एवं सेवानिवृत्त जिला उद्यानिकी अधिकारी पंडित रमेश तिवारी (72 वर्ष) ने लगभग तीन एकड़ भूमि को एक सुंदर एवं समृद्ध हरित वाटिका के रूप में विकसित कर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल कायम की है। उनकी 16 वर्षों की अथक साधना का परिणाम है कि आज यहां लगाए गए पौधे विशाल वृक्षों का रूप लेकर फल, फूल और औषधीय गुणों से समाज को लाभान्वित कर रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग में सेवा के दौरान प्राप्त अनुभव और ज्ञान का सदुपयोग करते हुए पंडित रमेश तिवारी ने वर्ष 2014 से अपनी वाटिका का विस्तार प्रारंभ किया। उन्होंने यहां मियाजाकी, जायक्यू, बनाना, लंगड़ा, दशहरी और फजली किस्म के आमों सहित काजू, चीकू, संतरा, अनार, अमरूद, मौसंबी, पपीता, केला, कटहल, जामुन, बेल, अशोक एवं नीम जैसे अनेक फलदार, छायादार और औषधीय पौधों का रोपण किया। आज ये सभी पौधे विकसित होकर विशाल वृक्ष बन चुके हैं और भरपूर फल प्रदान कर रहे हैं।

फलदार वृक्षों के साथ-साथ उन्होंने प्याज, लहसुन, भिंडी, लौकी, करेला, ककड़ी, पालक, मूली और टमाटर जैसी सब्जियों की भी खेती की है। उन्होंने बताया कि पौधों की नियमित निराई-गुड़ाई, देसी खाद का उपयोग तथा सुबह-शाम सिंचाई के माध्यम से उनकी निरंतर देखभाल की गई। इसी समर्पण और संरक्षण के कारण पौधे मजबूत एवं फलदायी वृक्षों के रूप में विकसित हो सके हैं।

पंडित रमेश तिवारी का कहना है कि उन्होंने ऑर्गेनिक नहीं, बल्कि पूर्णतः जैविक खेती की पद्धति को अपनाया है। उनके अनुसार जैविक खेती भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वे मानते हैं कि पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करनी पड़ती है, तभी वे विकसित होकर समाज के लिए उपयोगी बनते हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण मानव जीवन की अमूल्य धरोहर है। कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने ऑक्सीजन और हरियाली के महत्व को निकट से महसूस किया है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, खेत या उपलब्ध भूमि पर अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनकी नियमित देखभाल करनी चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण, बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन का उपहार भी प्राप्त होगा।

पंडित रमेश तिवारी की यह हरित वाटिका आज पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और प्रकृति प्रेम का प्रेरणास्रोत बनकर समाज को हरियाली बढ़ाने तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दे रही है।

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