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दुष्कर्म मामलों में बीएनएस की धाराएं लगाने में पुलिस से हो रहीं चूकें, मुख्यालय की समीक्षा में खुलीं कई खामियां

दुष्कर्म मामलों में बीएनएस की ...

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दुष्कर्म मामलों में बीएनएस की धाराएं लगाने में पुलिस से हो रहीं चूकें, मुख्यालय की समीक्षा में खुलीं कई खामियां

भोपाल। मध्य प्रदेश में दुष्कर्म से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं लगाने के दौरान पुलिस की ओर से गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में पता चला है कि कई मामलों में जरूरत से ज्यादा धाराएं जोड़ दी जाती हैं, जबकि कई ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
हाल ही में भोपाल के एक थाने में दर्ज हुए मामले की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि पुलिस ने दुष्कर्म की धारा तो दर्ज कर ली, लेकिन पीड़िता द्वारा मारपीट की शिकायत किए जाने के बावजूद उससे संबंधित धारा नहीं जोड़ी गई। इसी तरह पॉक्सो से जुड़े मामलों में भी पीड़िता की उम्र के आधार पर लागू होने वाली अलग-अलग बीएनएस धाराओं का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा है।
इन कमियों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में तीन सदस्यीय समीक्षा टीम बनाई है। यह टीम प्रतिदिन दर्ज होने वाले मामलों की जांच कर यह परखती है कि संबंधित प्रकरणों में उचित कानूनी धाराएं लगाई गई हैं या नहीं। समीक्षा के दौरान सामने आने वाली त्रुटियों को तत्काल विवेचना के स्तर पर सुधरवाया जा रहा है, ताकि अदालत में अभियोजन पक्ष कमजोर न पड़े।
प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 दुष्कर्म संबंधी मामले दर्ज होते हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने बताया कि जांच के दौरान ही आवश्यक सुधार कराए जा रहे हैं। इससे न केवल मामलों की कानूनी मजबूती बनी रहेगी, बल्कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सही धाराओं के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
पुलिस मुख्यालय ने जिन प्रकार की गलतियों की पहचान की है, उन्हें विस्तार से बताते हुए समय-समय पर भोपाल और इंदौर के पुलिस आयुक्तों सहित सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजे जा रहे हैं। 15 जुलाई को भी इस संबंध में एक पत्र जारी किया गया था। उल्लेखनीय है कि जिन त्रुटियों की पहचान अब मुख्यालय स्तर पर हो रही है, वे इससे पहले जिला स्तर पर अधिकारियों की नजर में नहीं आ सकी थीं।
समीक्षा में सामने आई प्रमुख कमियां
पॉक्सो मामलों में यदि पीड़िता की आयु 16 वर्ष से कम हो तो बीएनएस की धारा 65(1) और 12 वर्ष से कम होने पर धारा 65(2) लगाई जानी चाहिए, लेकिन कई मामलों में इसका सही पालन नहीं किया जा रहा है।
शादी का झांसा या झूठा विवाह का वादा कर दुष्कर्म करने के मामलों में बीएनएस की धारा 69 लागू होती है, लेकिन कुछ प्रकरणों में इसके साथ दुष्कर्म की सामान्य धारा 64 (पूर्व आईपीसी की धारा 376) भी जोड़ दी जाती है, जबकि इसकी आवश्यकता नहीं होती।
मानसिक रूप से विक्षिप्त पीड़िता से जुड़े मामलों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 92(घ) का समावेश कई बार नहीं किया जाता।
यदि किसी नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म के बाद वह गर्भवती हो जाती है, तो पॉक्सो एक्ट की धारा 5(जे-ii) भी जोड़ी जानी चाहिए, लेकिन कई मामलों में यह प्रावधान भी छूट रहा है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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