36.45 करोड़ की लागत से बने सांदीपनि विद्यालय की छत पहली बारिश में रिसन लगा पानी, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
सागर/देवरीकलां। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में लोकार्पित देवरी विधानसभा क्षेत्र की शासकीय सांदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय देवरी की नई इमारत पहली ही बारिश के बाद विवादों में आ गई है। लगभग 36.45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में कई स्थानों पर छत से पानी रिसने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी परीक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय निरीक्षण के दौरान विद्यालय के क्लासरूम, स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब सहित अन्य हिस्सों में छत से पानी टपकने की जानकारी मिली। बताया गया कि कुछ कक्षाओं में अध्ययन के दौरान ही पानी का रिसाव हुआ, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को असुविधा का सामना करना पड़ा। विद्यालय में करीब 3000 विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था है। ऐसे में पहली ही बारिश में भवन में रिसाव की शिकायतों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण संबंधी कमियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि भवन के लोकार्पण और हैंडओवर से पहले निर्माण एजेंसी, संबंधित इंजीनियरों तथा शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्ता की तकनीकी जांच की गई थी या नहीं। यदि जांच हुई थी, तो इतनी गंभीर खामियां कैसे नजरअंदाज हो गई। विद्यालय के प्राचार्य से इस संबंध में पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। नगर कांग्रेस अध्यक्ष गौरव पांडे ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित विद्यालय भवन का पहली ही बारिश में रिसाव होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कर दोषी ठेकेदार, इंजीनियरों और अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की। महाराजपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अमित सवैया ने आरोप लगाया कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता या किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिये। पूर्व मंत्री हर्ष यादव ने भी कहा कि पहली ही बारिश में भवन में रिसाव और जलभराव की शिकायतें सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की मांग की। फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन शिकायतों की जांच कराता है या नहीं तथा यदि निर्माण में खामियां पाई जाती हैं, तो जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जाती है।








