होम देश / विदेश मध्यप्रदेश राजनीति धर्म/अध्यात्म ऑटोमोबाइल सरकारी योजना खेल समाचार
By
On:

सागर: बरसात में जर्जर अस्पताल बना जानलेवा, प्रसूति वार्ड की छत का प्लास्टर गिरा

सागर: बरसात में जर्जर अस्पताल ...

[post_dates]

Sub Editor

Published on:

whatsapp

सागर: बरसात में जर्जर अस्पताल बना जानलेवा, प्रसूति वार्ड की छत का प्लास्टर गिरा

सागर : सागर जिले की सुरखी विधानसभा क्षेत्र के जैसीनगर मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर इमारत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बरसात शुरू होते ही अस्पताल भवन की खामियां खुलकर सामने आ गई हैं। अस्पताल की छतों से लगातार पानी टपक रहा है, जगह-जगह प्लास्टर उखड़ रहा है और कई हिस्सों में भवन की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसूति वार्ड की बताई जा रही है, जहां हाल ही में छत का प्लास्टर गिर चुका है। गनीमत रही कि जिस समय प्लास्टर गिरा, उस समय पलंग पर कोई मरीज मौजूद नहीं था। यदि उस समय कोई महिला या नवजात वहां होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

गैलरी से लेकर वार्ड तक पानी ही पानी

बारिश के दौरान अस्पताल की गैलरी में छत से लगातार पानी टपकता रहता है। अस्पताल के कई हिस्सों में सीलन और पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। पैथोलॉजी लैब, प्रसूति वार्ड और अन्य वार्डों में भी भवन की स्थिति खराब बताई जा रही है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इलाज कराने के लिए आने वाले लोगों को अब भवन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। वहीं डॉक्टर और अस्पताल का स्टाफ भी ऐसी जर्जर व्यवस्था के बीच काम करने को मजबूर हैं।

एक साल पहले भी उठी थी आवाज, फिर भी नहीं बदली तस्वीर

गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पहले भी बारिश के मौसम में ‘स्थानीय मीडिया’ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसीनगर की जर्जर हालत को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर के बाद तत्कालीन सीएमएचओ ममता तिमोरी ने अस्पताल का निरीक्षण किया था और भवन की जर्जर स्थिति को स्वीकार करते हुए जल्द मरम्मत कराने की बात कही थी।

वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत की ओर से भी अस्पताल भवन की मरम्मत का आश्वासन दिया गया था। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी अस्पताल की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। अब एक बार फिर बारिश के मौसम में वही समस्या सामने आ गई है।

रोजाना ढाई सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी

जैसीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की आवाजाही वाले अस्पताल भवन की जर्जर हालत गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का भवन अब मरम्मत से आगे की स्थिति में पहुंच चुका है और विशेषज्ञों द्वारा भी इसे तत्काल डिस्मेंटल कर नया भवन बनाए जाने की जरूरत बताई जा रही है।

सिविल अस्पताल और नए भवन की लगातार मांग

स्थानीय जनता लंबे समय से जैसीनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन कर इसे सिविल अस्पताल का दर्जा देने और नया भवन बनाने की मांग करती आ रही है। लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि जब तक नया भवन नहीं बनता, तब तक मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए अस्पताल को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में शिफ्ट किया जा सकता है।

खाली पड़े शासकीय भवनों में अस्पताल शिफ्ट करने का विकल्प

स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने कई विकल्प भी सुझाए हैं। जैसीनगर में कुछ शासकीय भवन खाली पड़े हैं। जनपद पंचायत के नए भवन में शिफ्ट होने के बाद पुराना भवन, शिक्षा विभाग की पुरानी खाली बिल्डिंग, मंगल भवन और अन्य उपलब्ध शासकीय भवनों का उपयोग अस्थायी रूप से अस्पताल के लिए किया जा सकता है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल को तत्काल किसी सुरक्षित भवन में शिफ्ट कर दिया जाए तो मरीजों और अस्पताल स्टाफ को जर्जर भवन के खतरे से बचाया जा सकता है।

लोगों का सवाल-किसी बड़े हादसे का इंतजार तो नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की छत से प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अभी तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। जनता का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। ऐसे में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस मामले में तत्काल निर्णय लेना चाहिए। भगवान न करे, किसी दिन जर्जर छत या प्लास्टर गिरने से कोई बड़ा हादसा हो जाए।अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन बारिश के दौरान केवल तात्कालिक मरम्मत कराएगा या फिर अस्पताल के लिए स्थायी समाधान की दिशा में भी कदम उठाएगा?

इनका कहना है

अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति का मामला मेरे संज्ञान में आया है। बरसात को देखते हुए तत्काल जो मरम्मत कराई जा सकती है, उसे कराया जाएगा। इसके बाद अस्पताल भवन के पूर्ण मेंटेनेंस के लिए एस्टीमेट तैयार कर संबंधित विभाग को भेजकर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी –प्रतिभा पाल कलेक्टर,सागर

Join our WhatsApp Group
Sub Editor

मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
error: RNVLive Content is protected !!