होम देश / विदेश मध्यप्रदेश राजनीति धर्म/अध्यात्म ऑटोमोबाइल सरकारी योजना खेल समाचार
By
On:

शाहजहां की शाही भेंट होने का दावा, करेरा में मिली सोने की मूठ वाली दुर्लभ तलवार ने बढ़ाई इतिहासकारों की दिलचस्पी

शाहजहां की शाही भेंट होने ...

[post_dates]

Sub Editor

Published on:

whatsapp

शाहजहां की शाही भेंट होने का दावा, करेरा में मिली सोने की मूठ वाली दुर्लभ तलवार ने बढ़ाई इतिहासकारों की दिलचस्पी

भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा क्षेत्र में चल रहे ज्ञान भारत मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण के दौरान इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर सामने आई है। पुरातत्व विशेषज्ञों को यहां सोने की मूठ वाली एक दुर्लभ तलवार मिली है। तलवार पर अंकित फारसी शिलालेख के आधार पर दावा किया जा रहा है कि मुगल सम्राट शाहजहां ने इसे करेरा किले के सेनापति सैयद सालार को विशेष शाही सम्मान के रूप में भेंट किया था।
पुरातत्वविदों के अनुसार यह तलवार अब तक सैयद सालार की नौवीं पीढ़ी की वंशज और पेशे से अधिवक्ता इत्रत जैदी के निजी संग्रह में सुरक्षित रखी गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हथियार उन चुनिंदा मुगलकालीन तलवारों में शामिल हो सकता है, जो आज भी सुरक्षित अवस्था में उपलब्ध हैं।
फारसी शिलालेख ने मजबूत किए दावे
इस सर्वेक्षण का नेतृत्व कर रहे वसीम खान ने बताया कि तलवार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उस पर सोने से उकेरा गया फारसी शिलालेख है। शिलालेख में उल्लेख मिलता है कि यह तलवार स्वयं शाहजहां ने सैयद सालार को भेंट की थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक तलवार पर अंकित ‘शमशीर आलेमानी बिन्ते शाहजहां बादशाह’ का आशय यह है कि सम्राट शाहजहां ने प्रतीकात्मक रूप से इस तलवार को अपनी पुत्री का दर्जा देकर सम्मानस्वरूप सैयद सालार को सौंपा था। यही शिलालेख इस ऐतिहासिक दावे का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
शाहजहां की निजी तलवार से मिलते हैं कई गुण
इतिहासकारों का कहना है कि इस तलवार की बनावट शाहजहां की निजी तलवार से काफी हद तक मेल खाती है। इसकी हल्की घुमावदार धार, सोने की जड़ाई, कलात्मक नक्काशी और डिस्क आकार का पोमेल इसे विशेष बनाते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्ष 2007 में सोथबीज़ की नीलामी में शाहजहां से जुड़ी एक समान तलवार प्रदर्शित की गई थी, जिसकी कीमत लगभग 717,800 डॉलर आंकी गई थी।
जानकारी के अनुसार शाहजहां की निजी तलवार वर्तमान में दोहा के इस्लामी कला संग्रहालय में संरक्षित है। उस तलवार पर छत्र, कमल और खसखस जैसे अलंकरण बने हुए हैं तथा उसका काल 1047 हिजरी (1637-1638 ईस्वी) माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि करेरा से सामने आई इस दुर्लभ तलवार के अध्ययन से मुगलकालीन इतिहास के कई अनछुए पहलुओं पर नए शोध का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

Join our WhatsApp Group
Sub Editor

मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
प्रमुख खबरें
View All
error: RNVLive Content is protected !!