900 किलोमीटर तक चला पीछा, सागर पुलिस ने पकड़ा अंतर्राज्यीय डंपर चोरी गिरोह; 12 लाख का वाहन बरामद
टोल प्लाजा के सीसीटीवी और तकनीकी जांच से खुला राज, राजस्थान से तीन आरोपी गिरफ्तार
सागर। सागर जिले की आगासौद थाना और मंडी बामौरा चौकी पुलिस ने अंतर्राज्यीय डंपर चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने करीब 900 किलोमीटर तक तकनीकी और मैदानी स्तर पर जांच करते हुए चोरी गया लगभग 12 लाख रुपये मूल्य का टाटा 10 व्हीलर टिपर (डंपर) भी बरामद कर लिया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया और नरेंद्र सोलंकी, एसडीओपी बीना अजय सनकत के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी आगासौद श्रीमती अनुपमा शर्मा के नेतृत्व में संचालित विशेष अभियान के दौरान की गई।
मामले की शुरुआत 20 जुलाई 2026 को हुई, जब उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी नवल सिंह यादव ने थाना आगासौद में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनका टाटा 10 व्हीलर टिपर (क्रमांक UP93 ET 0065) 18 जुलाई की रात बीना रिफाइनरी गेट के पास खड़ा था, जहां से अज्ञात बदमाश उसे चोरी कर ले गए। शिकायत के आधार पर थाना आगासौद में अपराध क्रमांक 138/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(2) के तहत जांच शुरू की गई।
प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, फरियादी और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए तथा तकनीकी साक्ष्य जुटाए। हालांकि शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।
इसके बाद पुलिस ने नेशनल हाईवे के अलग-अलग टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी जानकारियों का गहन विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि चोरी किया गया डंपर गुना की दिशा में गया था। इसके बाद उसकी गतिविधियों का क्रमशः बारां, कोटा, ब्यावर, पाली और जोधपुर के पास स्थित निम्बाली टोल प्लाजा तक पीछा किया गया। करीब 900 किलोमीटर लंबी जांच के दौरान पुलिस ने यह भी पता लगाया कि आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए राजस्थान में पंजीकृत दूसरे डंपर के फास्टैग का इस्तेमाल कर कई टोल नाके पार किए थे।
तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस बायतू (जिला बाड़मेर) निवासी डालूराम तक पहुंची, जिसके नाम पर संबंधित फास्टैग पंजीकृत था। शुरुआत में उसने किसी भी जानकारी से इनकार किया, लेकिन पूछताछ के दौरान उसने बताया कि वह फास्टैग उसके पूर्व चालक भंवराराम ढाका के पास था।
इस सुराग के बाद पुलिस टीम ने राजस्थान के बालोतरा, बाड़मेर और जोधपुर जिलों में लगातार करीब एक सप्ताह तक आरोपियों की तलाश की। लगातार तकनीकी विश्लेषण और निगरानी के बाद 5 अगस्त 2026 की रात संदेही भंवराराम ढाका को बालोतरा जिले के सिणधरी क्षेत्र से हिरासत में लिया गया।
पूछताछ के दौरान भंवराराम ने खुलासा किया कि उसने अपने बड़े भाई विकास उर्फ हेमाराम ढाका और मित्र सरूपाराम मायला के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से डंपर चोरी की थी। सरूपाराम पहले बीना रिफाइनरी क्षेत्र में डंपर चालक के रूप में काम कर चुका था। आरोपियों ने चोरी के बाद वाहन को राजस्थान पहुंचा दिया था और पुलिस से बचने के लिए आगे महाराष्ट्र के कोल्हापुर भागने की तैयारी कर रहे थे।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी गया टाटा 10 व्हीलर टिपर (क्रमांक UP93 ET 0065) बरामद कर लिया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है। इसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपी
- भंवराराम ढाका पिता बाबूराम ढाका, उम्र 22 वर्ष, निवासी चंपाबेरी, थाना पचपदरा, जिला बालोतरा (राजस्थान)।
- विकास उर्फ हेमाराम ढाका पिता बाबूराम ढाका, उम्र 24 वर्ष, निवासी चंपाबेरी, थाना पचपदरा, जिला बालोतरा (राजस्थान)।
- सरूपाराम मायला पिता लिकमाराम मायला, उम्र 20 वर्ष, निवासी कालेवा, थाना पचपदरा, जिला बालोतरा (राजस्थान)।
बरामदगी
- लगभग 12 लाख रुपये मूल्य का चोरी गया टाटा 10 व्हीलर टिपर (डंपर) क्रमांक UP93 ET 0065।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
मामले के खुलासे में मंडी बामौरा चौकी प्रभारी उप निरीक्षक प्रदीप कुमार जाटव, प्रधान आरक्षक जयपाल सिंह घोष और आरक्षक दीपेन्द्र की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वहीं प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, हेमंत सिंह, सुशील सिंह चौहान, प्रधान आरक्षक संतोष रैकवार, रोहित विश्वकर्मा और आरक्षक जीतेन्द्र ने भी कार्रवाई में सक्रिय सहयोग दिया।
पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई से न केवल अंतर्राज्यीय डंपर चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ, बल्कि चोरी गया भारी वाहन भी सुरक्षित बरामद कर लिया गया। यह सफलता तकनीकी जांच, सतत विवेचना और विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम मानी जा रही है।








