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त्योहारी सीजन से पहले MP में शकर पर बड़ा फैसला, 4,000 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे डीलर

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त्योहारी सीजन से पहले MP में शकर पर बड़ा फैसला, 4,000 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे डीलर

भोपाल। त्योहारी सीजन में शकर की बढ़ती मांग और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने डीलरों के स्टॉक को लेकर नई सीमा तय की है। देशभर में 30 नवंबर तक कोई भी शकर डीलर अधिकतम 4,000 क्विंटल तक ही शकर का भंडारण कर सकेगा। इसके अलावा डीलरों को शकर प्राप्त होने के 30 दिनों के अंदर उसकी बिक्री करना जरूरी होगा।
केंद्र के निर्देशों के बाद अब मध्य प्रदेश में भी इसी व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है। इसके लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी। सरकार का मकसद त्योहारी दिनों में बाजार में शकर की उपलब्धता पर्याप्त बनाए रखना और अधिक मांग के बीच कीमतों में होने वाली अनावश्यक बढ़ोतरी पर रोक लगाना है।
थोक बाजार में करीब 55 रुपये, फुटकर में 60 रुपये किलो तक भाव
फिलहाल बाजार में शकर के थोक दाम करीब 55 रुपये प्रति किलो बताए जा रहे हैं। वहीं फुटकर बाजार में उपभोक्ताओं को इसके लिए लगभग 60 रुपये प्रति किलो तक कीमत चुकानी पड़ रही है। त्योहारी सीजन में खपत बढ़ने की संभावना के बीच दामों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने डीलरों के लिए स्टॉक की अधिकतम सीमा निर्धारित की है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार केंद्र की ओर से जारी निर्देश सभी राज्यों के लिए हैं। मध्य प्रदेश में भी इन्हीं नियमों के आधार पर शकर के भंडारण और बिक्री की निगरानी की जाएगी।

1 अप्रैल से पीडीएस में नहीं मिल रही शकर

इधर, मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस के जरिए दी जाने वाली शकर का वितरण भी 1 अप्रैल से बंद है। इससे पहले अंत्योदय परिवारों को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से हर महीने 20 रुपये प्रति किलो की दर पर शकर उपलब्ध कराई जाती थी।
केंद्र सरकार की ओर से शकर पर मिलने वाली सब्सिडी बंद किए जाने के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो गई। सरकार की ओर से इसके पीछे तर्क दिया गया कि अनुदान खत्म होने के बाद बाजार में मिलने वाली शकर और उचित मूल्य की दुकान से मिलने वाली शकर की कीमत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रह गया था।

जमाखोरी रोकने पर सरकार का फोकस

नई स्टॉक सीमा लागू करने का प्रमुख उद्देश्य बाजार में शकर की कृत्रिम कमी पैदा करने वाली जमाखोरी को रोकना है। डीलरों के पास रखे जाने वाले स्टॉक की सीमा तय करने के साथ ही 30 दिनों के भीतर शकर बेचने की बाध्यता से बाजार में लगातार आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से त्योहारी सीजन के दौरान शकर की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी और बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं पर कीमतों में अनावश्यक वृद्धि का दबाव कम किया जा सकेगा।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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