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72 घंटे पानी में बैठा किसान, तबीयत बिगड़ी तो ICU में भर्ती; 40 लाख मुआवजे की मांग पर प्रशासन बोला- मांग उचित नहीं

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72 घंटे पानी में बैठा किसान, तबीयत बिगड़ी तो ICU में भर्ती; 40 लाख मुआवजे की मांग पर प्रशासन बोला- मांग उचित नहीं

रीवा। जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के बेला गांव में निजी कृषि भूमि से हाई एक्सटेंशन लाइन और ट्रांसमिशन टावर लगाए जाने को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर किसान देशराज मिश्रा ने करीब 72 घंटे तक पानी भरे गड्ढे में बैठकर जल सत्याग्रह किया। लगातार पानी में बैठे रहने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल देशराज आईसीयू में उपचाररत हैं।

अस्पताल में भर्ती देशराज मिश्रा और उनके भाई ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने किसान के आरोपों को खारिज करते हुए प्रशासन का पक्ष रखा है। कलेक्टर का कहना है कि किसान को नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन उनके द्वारा की जा रही 40 लाख रुपये की मांग उचित नहीं है।

तीन दिन तक पानी में बैठकर किया विरोध

बेला गांव में निजी कृषि भूमि से पावर ट्रांसमिशन लाइन और टावर लगाए जाने को लेकर देशराज मिश्रा ने अपनी मांगों के समर्थन में जल सत्याग्रह शुरू किया था। उनका आरोप था कि उनकी जमीन से जुड़े मामले में कंपनी और प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अपनी मांगों को लेकर देशराज करीब तीन दिनों तक पानी से भरे गड्ढे में बैठे रहे। इसी दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें संजय गांधी अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। यहां उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।

कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर की थी बात

कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के मुताबिक, वह दो-तीन दिन पहले रात में खुद किसान के पास पहुंचे थे। उस समय देशराज की तबीयत ठीक नहीं थी। प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में उनके घर पहुंचाया गया। कलेक्टर के अनुसार, प्रशासन के अनुरोध पर किसान ने उस समय अपना धरना समाप्त कर दिया था।

हालांकि, इसके बाद देशराज ने दोबारा धरना शुरू कर दिया। जल सत्याग्रह के दौरान उनकी तबीयत फिर बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

16×16 मीटर के टावर के लिए 40 लाख की मांग

कलेक्टर ने बताया कि देशराज मिश्रा की जमीन के हिस्से में 16 मीटर बाय 16 मीटर क्षेत्र में ट्रांसमिशन टावर लगाया जा रहा है। इसके एवज में किसान 40 लाख रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने इस मांग को पूरी तरह अनुचित बताया है।

कलेक्टर के अनुसार, पावर ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाता। टावर स्थापित होने के बाद भी किसान अपनी जमीन पर खेती कर सकते हैं। सरकारी गाइडलाइन के आधार पर किसान का मुआवजा करीब 35 हजार रुपये बनता है। प्रशासन इसका दोगुना, यानी लगभग 70 से 80 हजार रुपये तक मुआवजा देने के लिए तैयार है।

पथरीली जमीन होने की भी बात कही

कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने यह भी कहा कि जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, वह उपजाऊ भूमि नहीं है। वहां बड़ी-बड़ी चट्टानें और पथरीले पहाड़ मौजूद हैं।ट्रांसमिशन लाइन का रूट बदलने की मांग पर कलेक्टर ने कहा कि हैवी पावर लाइन को जिग-जैग तरीके से नहीं ले जाया जा सकता। संबंधित एक्ट के तहत निर्धारित रूट पर मुआवजा देकर काम पूरा करने का प्रावधान है। कलेक्टर के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत होने वाले इस काम को रोकने का अधिकार किसी के पास नहीं है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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