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सागर में फर्जी फर्मों से करोड़ों के ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क बेनकाब, 2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद

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सागर में फर्जी फर्मों से करोड़ों के ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क बेनकाब, 2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद

बेरोजगारों के दस्तावेजों से खुलवाते थे म्यूल बैंक खाते, 30 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा; खातों में 5.50 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजेक्शन मिले

सागर। साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का सागर पुलिस ने खुलासा किया है। मकरोनिया पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह बेरोजगार और सामान्य लोगों को कमीशन व पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्म बनाकर अलग-अलग निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर साइबर ठगी और ऑनलाइन बेटिंग से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए इस्तेमाल करता था।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में अब तक 30 से ज्यादा फर्जी फर्मों का पता चला है। इनके नाम से खोले गए बैंक खातों के शुरुआती वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया के निर्देश पर जिले में साइबर अपराध और साइबर ठगी से जुड़े मामलों की लगातार तकनीकी जांच की जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना जयवीर सिंह भदौरिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेन्द्र सोलंकी के मार्गदर्शन तथा नगर पुलिस अधीक्षक सागर ललित कुमार कश्यप के निर्देशन में मकरोनिया पुलिस ने यह कार्रवाई की।

एक शिकायत से खुला फर्जी फर्म और बैंक खाते का राज

13/08/2026 को रोहित पिता रूपराज पटेल ने मकरोनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित खाते की जांच शुरू की। बैंक रिकॉर्ड के प्रारंभिक परीक्षण में पता चला कि रोहित के नाम से “ग्लैमर इंटरप्राइजेस” नाम की फर्म तैयार की गई थी। फरवरी 2026 से करीब छह महीने के दौरान इस खाते में लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र सोलंकी की निगरानी में मकरोनिया थाना प्रभारी नितिन पाल के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम ने बैंक खातों, फर्मों, लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग टीम भी गठित की गई।

पूछताछ में सामने आया पूरा नेटवर्क

जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि धर्मेन्द्र ने यह काम अमित विश्वकर्मा निवासी भोपाल से मुंबई में सीखा था। अमित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग से आने वाली रकम को अलग-अलग खातों के जरिए इधर-उधर करने के लिए बैंक खातों की जरूरत होती थी।

इसके बाद धर्मेन्द्र नाहर ने सागर के अपने साथी सोनू दांगी के साथ सरमन उर्फ शुभम रैकवार निवासी खजुराहो, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे निवासी भोपाल के साथ मिलकर बेरोजगार लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी फर्में तैयार करना और निजी बैंकों में खाते खुलवाना शुरू किया।

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन बेटिंग का संचालन धर्मेन्द्र का परिचित रिषभ पटेल निवासी भोपाल करता था। इसके बाद पुलिस टीम ने रिषभ को तलाश कर गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से ऑनलाइन बेटिंग से संबंधित 2,69,42,700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये का सोना और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।

वेबसाइट और टेलीग्राम के जरिए चल रहा था ऑनलाइन बेटिंग का काम

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में रिषभ पटेल ने ऑनलाइन बेटिंग से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उसके मुताबिक वह भोपाल से ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट www.20wicket.com, www.goexch99.com और अन्य वेबसाइटों के माध्यम से बेटिंग करवाता था।

फर्जी फर्मों के बैंक खातों में रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती थी और बाद में उसे नकद निकाला जाता था। ग्राहकों से संपर्क बनाए रखने के लिए टेलीग्राम के जरिए ग्रुप और चैनल बनाए गए थे। ऑनलाइन सट्टे के पैनल में एडमिन के तौर पर ग्राहकों को लिंक और क्रेडिट कॉइन भेजकर बेटिंग कराई जाती थी।

अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को न्यायालय से आठ दिन की पुलिस रिमांड मिली है। पुलिस दोनों से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरे सिस्टम के संबंध में पूछताछ कर रही है।

30 से ज्यादा फर्जी फर्में सामने आईं

आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता लगा चुकी है। इन फर्मों के नाम पर अलग-अलग निजी बैंकों में खाते खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा था।

जांच में सामने आई फर्मों में ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स, शर्मा जी इंटरप्राइजेस, सौरभ इंटरप्राइजेस, माखन इंटरप्राइजेस, अंकेश इंटरप्राइजेस, तनविक इंटरप्राइजेस, यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स, महाकाल ट्रैडर्स, मैक्स ट्रैडर्स, बालाजी ट्रैडर्स और जय महाकाल टूर एण्ड ट्रेवल्स शामिल हैं।

इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों के शुरुआती वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन सामने आया है। पुलिस अब सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय परीक्षण कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ संदिग्ध रकम और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

पुलिस अब केवल गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रख रही है। फर्जी फर्मों के पंजीयन और संबंधित बैंक खातों को खुलवाने में किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका रही, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन या बैंक खातों के संचालन में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति या संस्था की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

छह आरोपी गिरफ्तार, दो फरार

इस मामले में पुलिस ने धर्मेन्द्र पिता हरिदास नाहर, उम्र 38 वर्ष, निवासी सिविल लाइन के पीछे, जिला खजुराहो, छतरपुर (म.प्र.), हाल निवासी शिवनगर, थाना बहेरिया, जिला सागर; सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, जिला सागर; अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी 10 मंगल नगर सुखलिया इंदौर, हाल रोहित नगर भोपाल; विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, उम्र 36 वर्ष, निवासी 186 नीरजा नगर, जेके रोड, नरेला संकरी, थाना पिपलानी, जिला भोपाल; स्वर्णेन्द्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, उम्र 33 वर्ष, निवासी मकान नंबर 29, पीताम्बरा होम्स, खजूरी कला, थाना अवधपुरी, भोपाल तथा रिषभ पटैल पिता स्व. रवि पटैल, उम्र 27 वर्ष, स्थायी निवासी बिन्जियाँ जिला मंडला, वर्तमान पता बी-01 महाकाली सोसाइटी, त्रिलंगा, औरा मॉल के पास, थाना शाहपुरा, भोपाल को गिरफ्तार किया है।

वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार, पूरण लाल अहिरवार निवासी खजुराहो, छतरपुर, वर्तमान पता भोपाल और ऋषि केशव सिंह पिता अरविन्द सिंह चौहान निवासी पिपरोहर, थाना कोतवाली जिला सीधी, वर्तमान पता 12, मेन बस स्टेंड भोपाल फरार बताए गए हैं। पुलिस टीमें दोनों की तलाश में लगातार जुटी हुई हैं।

पुलिस ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील

सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई का लालच मिलने पर किसी को अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या बैंकिंग से जुड़ी अन्य जानकारी न दें।

पुलिस ने यह भी कहा है कि किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन किसी और को सौंपना कानूनी रूप से गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। यदि ऐसे खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में होता है, तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

पूरी कार्रवाई में निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी मकरोनिया, उपनिरीक्षक शशिकांत गुर्जर थाना प्रभारी बहेरिया, उपनिरीक्षक रामअवतार धाकड़ चौकी प्रभारी बिलहेरा, सहायक उपनिरीक्षक काशीराम ठाकुर, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, आरक्षक हेमेन्द्र ठाकुर साइबर सेल सागर, आरक्षक आशीष गौतम, आरक्षक प्रदीप शर्मा, आरक्षक आशीष यादव, आरक्षक मनीष तिवारी, आरक्षक शुभम, आरक्षक रघुराज सिंह, आरक्षक ब्रिजेश विश्वकर्मा, सैनिक राजेन्द्र ठाकुर तथा थाना शाहपुरा के उपनिरीक्षक हरीश, आरक्षक भानु प्रताप गुर्जर और आरक्षक बाबू लाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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