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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की भर्ती पर अंतरिम रोक, ओटी टेक्नीशियन के 288 पदों की मेरिट लिस्ट और नियुक्तियां प्रभावित

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की भर्ती पर अंतरिम रोक, ओटी टेक्नीशियन के 288 पदों की मेरिट लिस्ट और नियुक्तियां प्रभावित

31 मार्च 2026 की मेरिट लिस्ट पर रोक; पात्रता नियमों में भर्ती के बाद किए गए बदलाव को लेकर याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल, 5 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत ओटी टेक्नीशियन के 288 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने 31 मार्च 2026 को जारी की गई मेरिट लिस्ट और उसके आधार पर दी गई नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले में राज्य शासन, संबंधित विभागों, कर्मचारी चयन मंडल सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

यह विवाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद ओटी टेक्नीशियन पद की पात्रता शर्तों में किए गए बदलाव को लेकर सामने आया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर्यन उर्मलिया ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद पात्रता के मूल नियमों में बदलाव करके ऐसे अभ्यर्थियों को भी अवसर देना, जो विज्ञापन के समय निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे, समान अवसर के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल है। अधिवक्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के प्रावधानों के विपरीत बताया।

भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बदले पात्रता के नियम

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जब ओटी टेक्नीशियन के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था, उस समय शैक्षणिक योग्यता और प्रमाण-पत्र से संबंधित जो शर्तें निर्धारित थीं, अभ्यर्थियों ने उन्हीं को ध्यान में रखते हुए आवेदन किए थे। इसी आधार पर वे चयन प्रक्रिया में भी शामिल हुए।

इसके बाद शासन ने 10 अगस्त 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए पात्रता से संबंधित प्रावधान में संशोधन कर दिया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद पात्रता में ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता, जिससे विज्ञापन जारी होने के समय निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थी भी उसी भर्ती में पात्र हो जाएं। इस दलील के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का भी हवाला दिया गया।

निजी संस्थानों की योग्यता को मान्यता देने पर आपत्ति नहीं

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें निजी संस्थानों से प्राप्त योग्यता को भविष्य में होने वाली भर्तियों में मान्यता दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध केवल इस बात को लेकर है कि बाद में किए गए संशोधन को पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया में लागू किया जा रहा है।

उनका कहना है कि ऐसा करने से मूल विज्ञापन में तय पात्रता के आधार पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि भर्ती की मेरिट लिस्ट 31 मार्च 2026 को जारी हो चुकी थी, जबकि पात्रता से संबंधित संशोधन इसके बाद 10 अगस्त 2026 को किया गया। संशोधित प्रावधानों के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्तियां भी दी जा चुकी हैं।

मेरिट लिस्ट और नियुक्तियों पर अंतरिम रोक

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए 31 मार्च 2026 को जारी मेरिट लिस्ट तथा उसके आधार पर की गई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी। राज्य शासन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

अदालत के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल उक्त मेरिट लिस्ट के आधार पर आगे की नियुक्तियों पर भी रोक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 5 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि 10 अगस्त 2026 को किए गए पात्रता संबंधी संशोधन को वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर लागू न किया जाए। साथ ही, मूल विज्ञापन में निर्धारित योग्यता और पात्रता शर्तों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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