चीतों के स्वागत के लिए तैयार हुआ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आज होगी चीतों की शिफ्टिंग 100 साल बाद लौटेंगे नौरादेही अभयारण्य में चीते
कूनो नेशनल पार्क से लाए जाएंगे नौरादेही टाइगर रिजर्व की मुहली रेंज में बने बोमा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव छोड़ेंगे 2 चीते

अब यह तीन बड़ी बिल्लियों का बना अनोखा घर
रिपोर्ट – विशाल रजक
तेंदूखेड़ा/दमोह। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अब प्रदेश में वन्यजीवों की नई पहचान बनने जा रहा है यहां दुनिया की अनोखी बसाहट होगी जहां बड़ी बिल्लियों के परिवार बिग कैट फैमिली के तीन प्रमुख शिकारी बाघ तेंदुआ और अब चीता एक साथ रहेंगे दरअसल
मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना परियोजना का विस्तार अब बुंदेलखंड तक होने जा रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में कूनो नेशनल पार्क से दो चीते लाए जाएंगे जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दोनों चीतों को सॉफ्ट रिलीज बोमा में छोड़ेंगे आज पहले चरण में कूनो नेशनल पार्क से नर चीता थोलो और मादा चीता CCB-3 को नौरादेही लाया जाएगा चीता स्टीयरिंग कमेटी ने नौरादेही में कुल चार चीतों को बसाने की मंजूरी दी है
रिजर्व में आज मुख्यमंत्री करेंगे चीतों को रिलीज
वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नौरादेही पहुंचेंगे और यहां पर और चीता प्रोजेक्ट के तहत दोनों चीतों को निर्धारित सॉफ्ट रिलीज क्षेत्र में छोड़ेंगे। इस दौरान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को पुरस्कार भी दिए जाएंगे
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर टाइगर रिजर्व में तैयारियां की पूर्ण हो चुकी है प्रशासन और वन विभाग की ओर से सुरक्षा, निगरानी और अन्य व्यवस्थाएं कर ली गई है
439 हेक्टेयर में तैयार किया गया बोमा
चीतों को सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय शुरुआत में करीब 439 हेक्टेयर के सॉफ्ट रिलीज बोमा में रखा जाएगा इसे पांच हिस्सों में तैयार किया गया है। चीतों की सुरक्षा के लिए पावर फेंसिंग और 24 घंटे निगरानी एवं ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व करीब 2,340 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और क्षेत्रफल के लिहाज से मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां खुले जंगल और घास के मैदान चीतों के लिए अनुकूल माने जा रहे हैं
मध्यप्रदेश में तीसरा चीता ठिकाना बना नौरादेही
नौरादेही में दो चीतों के आने के बाद मध्यप्रदेश में चीतों के तीन प्रमुख ठिकाने हो जाएंगे – कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर अभयारण्य और अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही)। चीतों के आगमन को प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना परियोजना के अगले चरण के तौर पर देखा जाएगा
चीतों के स्वागत की तैयारिया पूरी
चीतों की सुरक्षित बसाहट के लिए मुहाली रेंज में आवश्यक तैयारियां कर ली गई हैं। यहां दो प्रकार के बोमा (डोम) बनाए गए हैं पहले चरण में चीतों को क्वारेंटाइन बोमा में रखा जाएगा। यह अपेक्षाकृत आकार में छोटे हैं, ताकि चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार, संभावित बीमारियों और नए स्थान में सर्वाइवल का आंकलन किया जा सके
12 से 15 दिन तक क्वारेंटाइन में रखने के बाद चीतों को सॉफ्ट रिलीज बोमा में शिफ्ट किया जाएगा, जिसका क्षेत्रफल लगभग 80 से 100 हेक्टेयर होगा। चीतों की निगरानी और प्रबंधन के लिए करीब 100 को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है
100 साल बाद लौट रहे चीते
बताया जाता हैं नौरादेही क्षेत्र के जंगलों में करीब एक सदी पहले चीते पाए जाते थे. उस समय इस क्षेत्र में बाघ और तेंदुए भी मौजूद थे. बाद में देश से चीते विलुप्त हो गए और इस क्षेत्र से भी उनका अस्तित्व समाप्त हो गया
अब करीब 100 साल बाद एक बार फिर इसी प्राकृतिक क्षेत्र में चीतों को बसाया जा रहा है अगर यहां चीते सफलतापूर्वक अनुकूलित होते हैं, तो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व देश में चीता संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है
वन्यजीव पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
टाइगर रिजर्व में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों के आने पर होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, स्थानीय कारोबार और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं








