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तेंदूखेड़ा जनपद में 10 साल से जमे मनरेगा लेखपाल पर गिरी गाज, आर्थिक अनियमितता पर दमोह अटैच

तेंदूखेड़ा जनपद में 10 साल ...

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तेंदूखेड़ा जनपद में 10 साल से जमे मनरेगा लेखपाल पर गिरी गाज, आर्थिक अनियमितता पर दमोह अटैच

चहेती पंचायतों को 4 करोड़ का भुगतान, ईमानदार पंचायतों के बिल 3 साल से पेंडिंग – जनपद अध्यक्ष की अनसुनी, सरपंचों ने लगाया कमीशनखोरी का आरोप

तेंदूखेड़ा। तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत में पिछले 10 साल से अधिक समय से अंगद के पांव की तरह जमे मनरेगा लेखपाल राहुल गांगरा पर आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई की है। आर्थिक अनियमितताओं, लापरवाही और मनमानी के गंभीर आरोपों के चलते कलेक्टर के आदेश पर जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे ने उन्हें तेंदूखेड़ा से हटाकर दमोह जिला पंचायत में अटैच कर दिया है। चर्चा है कि अटैच होने के बाद भी वे फिर से तेंदूखेड़ा वापसी के लिए जुगाड़ में लगे हैं।

4 करोड़ में चहेतों को भुगतान, बाकी पंचायतें तरसती रहीं

सूत्रों के अनुसार विगत माह शासन से मनरेगा के तहत करीब 4 करोड़ रुपये की राशि जनपद को प्राप्त हुई थी। आरोप है कि लेखपाल ने इस राशि में से अधिकांश हिस्सा अपनी चहेती पंचायतों के सरपंच-सचिवों के खातों में डाल दिया, जबकि कई पंचायतों के भुगतान 2 से 3 साल से लंबित होने के बावजूद नहीं किए गए
इस संबंध में जनपद अध्यक्ष तुलाराम यादव ने मौखिक और लिखित पत्र के माध्यम से कई बार भुगतान करने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी भी अनसुनी कर दी गई। जिन पंचायतों ने 2-3 साल पहले सड़क, नाली, मेड़ बंधान, खेत-तालाब और सामुदायिक भवन जैसे विकास कार्य पूर्ण कर लिए थे, उन्हें भुगतान नहीं मिला
कमीशनखोरी का आरोप, सरपंच बोले – बिना कमीशन नहीं होता भुगतान
कई सरपंच-सचिवों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राहुल गांगरा वर्षों से तेंदूखेड़ा में पदस्थ होने के कारण अधिकारियों पर हावी थे। आरोप है कि वे कमीशन लेकर चहेती पंचायतों का भुगतान तुरंत कर देते थे, जबकि ईमानदारी से काम करने वाली और कमीशन न देने वाली पंचायतों के बिल जानबूझकर रोक दिए जाते थे।
10 साल से एक ही कुर्सी पर, नेताओं का संरक्षण ?
ग्रामीणों का कहना है कि राहुल गांगरा दमोह से रोज तेंदूखेड़ा आना-जाना करते थे, फिर भी 10 साल से अधिक समय तक उनका स्थानांतरण नहीं हुआ। जबकि जनपद के अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले होते रहे। आरोप है कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार सरपंच-सचिवों की सामूहिक शिकायत के बाद कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया।

करोड़ों की संपत्ति और फर्जी कार्यों का खेल, जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि उनके कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायतों में हुए सभी भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप है कि कई पंचायतों में निर्माण कार्य अधूरे हैं, कई जगह कागजों में ही कार्य पूर्ण दिखाकर पूरी राशि का बंदरबांट कर दिया गया। सूत्रों का दावा है कि तेंदूखेड़ा में पदस्थ रहते हुए लेखपाल ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। यदि जांच हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं और कई सरपंच-सचिव भी लपेटे में आ सकते हैं।

अधिकारियों ने की पुष्टि

मामले में प्रभारी जनपद सीईओ सह एसडीएम तेंदूखेड़ा सी.जी. गोस्वामी ने बताया कि सरपंच-सचिवों की शिकायतों के आधार पर जिला पंचायत सीईओ को पत्र भेजकर कलेक्टर महोदय को अवगत कराया गया था। उसी पर कार्रवाई करते हुए कलेक्टर के आदेश पर जिला पंचायत सीईओ ने राहुल गांगरा को जिला पंचायत दमोह में अटैच किया है

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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