177 बचत बैंक और दो सुकन्या समृद्धि खातों की रकम में हुई थी हेराफेरी, सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाई सजा
जबलपुर। मोतीनाला उप डाकघर में खाताधारकों की जमा पूंजी के गबन के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सह-आरोपित पुनीत सेन को दोषी करार देते हुए चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में 65 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि का गबन किया गया था। इसमें 177 बचत बैंक खातों और दो सुकन्या समृद्धि खातों में जमा रकम को निशाना बनाया गया था। विशेष न्यायाधीश रूपेश गुप्ता ने 31 अक्टूबर को अलग-अलग धाराओं में सजा के साथ अर्थदंड भी लगाया।
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, जबलपुर की जांच के मुताबिक, यह गड़बड़ी 11 सितंबर 2020 से 9 अप्रैल 2022 के बीच हुई थी। उस दौरान मोतीनाला उप डाकघर में पदस्थ तत्कालीन उप डाकपाल बलवान शाह भलावी और जीडीएस आउटसाइडर पुनीत सेन ने कथित तौर पर मिलकर 65 लाख 2 हजार 488 रुपये की रकम का गबन किया।
आरोपियों ने खाताधारकों को धोखे में रखने के लिए उनकी पासबुक में जमा रकम की एंट्री की और उस पर डाकघर की मुहर भी लगा दी। इससे खाताधारकों को यही लगता रहा कि उनकी बचत सुरक्षित रूप से खाते में जमा हो रही है। दूसरी ओर, इन लेन-देन का कोई विवरण डाकघर के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता था। दैनिक लेन-देन रिपोर्ट, लॉन्ग बुक और फिनेकल लेजर में भी इनका हिसाब नहीं मिलता था।
पासबुक में रकम दर्ज, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में नहीं था हिसाब
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि खातों से पैसे निकालने के लिए निकासी वाउचरों पर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके से खाताधारकों की पासबुक में उनकी जमा पूंजी का विवरण तो मौजूद रहा, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में उस रकम का कोई लेखा-जोखा नहीं था।
मामले की पड़ताल के दौरान सीबीआई ने खाताधारकों के बयान दर्ज किए और पासबुक, निकासी वाउचर सहित डाकघर के विभिन्न दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर एकत्र किया। दस्तावेजों और हस्तलेखन की वैज्ञानिक जांच के लिए सीएफएसएल भोपाल की रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत की गई।
मुख्य आरोपी की मौत के बाद पुनीत सेन के खिलाफ चली सुनवाई
इस प्रकरण में तत्कालीन उप डाकपाल और मुख्य आरोपित बलवान शाह भलावी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई, जबकि सह-आरोपित पुनीत सेन के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही। अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर पुनीत सेन को दोषी ठहराया।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के साथ धारा 409 के तहत चार साल का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, धारा 467 के साथ धारा 471 के तहत तीन साल की सजा और एक हजार रुपये अर्थदंड सुनाया गया। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के साथ धारा 13(2) के तहत भी चार साल का कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया।
इस मामले में सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक संजय उपाध्याय ने पैरवी की।








