सागर जिले में अब पुलिस की कमान एक ऐसे अधिकारी के हाथों में है, जिनके पास पुलिस सेवा का तीन दशक से भी ज्यादा का अनुभव है।
कभी नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिसिंग की जिम्मेदारी, कभी सांप्रदायिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था संभालने की चुनौती, तो कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त में बड़ी कार्रवाई।
इतना ही नहीं, इनकी सेवाएं देश की सीमाओं से बाहर संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन तक भी पहुंच चुकी हैं।
हम बात कर रहे हैं सागर के नए पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा की।
30 अक्टूबर को उन्होंने सागर एसपी का पदभार संभाल लिया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन हैं संजीव कुमार सिन्हा? इनका पुलिस सेवा का सफर कैसा रहा है? किन महत्वपूर्ण मामलों और जिम्मेदारियों में इनकी भूमिका रही है और सागर जिले की जिम्मेदारी इन्हें क्यों सौंपी गई?
आज की इस खास रिपोर्ट में सागर की जनता को मिलवाते हैं जिले के नए पुलिस कप्तान से।

पुलिस सेवा का सफर: 1996 से अब तक
संजीव कुमार सिन्हा ने 1 जुलाई 1996 को मध्यप्रदेश पुलिस में डीएसपी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं।
लगभग 20 साल तक राज्य पुलिस सेवा में काम करने के बाद वर्ष 2016 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS में पदोन्नति मिली।
तीन दशक से अधिक के अपने सेवाकाल में उन्होंने प्रदेश के कई जिलों और महत्वपूर्ण पुलिस इकाइयों में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
जब संभाला सांप्रदायिक तनाव और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का मोर्चा
अलीराजपुर में पदस्थापना के दौरान गोधरा कांड के बाद पैदा हुए सांप्रदायिक तनावपूर्ण हालात में उन्होंने कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी निभाई।
वहीं मंडला में रहते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों की निगरानी में भी योगदान दिया।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए WWF के साथ समन्वय कर काम किया।
देश ही नहीं, विदेश में भी निभाई पुलिसिंग की जिम्मेदारी
संजीव कुमार सिन्हा के करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत लाइबेरिया में उनकी तैनाती रही।
यहां उन्होंने डिप्टी ऑपरेशंस कोऑर्डिनेटर के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
उनके अधीन 29 में से 19 संयुक्त राष्ट्र पुलिस स्टेशन और 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुलिस अधिकारियों के कार्यों के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी थी।
लाइबेरिया की राष्ट्रीय पुलिस के साथ समन्वय कर आधुनिक पुलिसिंग व्यवस्था को लागू करने में भी उन्होंने योगदान दिया।
लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई
मार्च 2017 से मई 2022 तक वे विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त संगठन में पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ रहे।
इस दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में कार्रवाई और अनुसंधान की जिम्मेदारी निभाई।
सतना नगर निगम आयुक्त से जुड़ा 12 लाख रुपये की रिश्वत का ट्रैप मामला भी उनके कार्यकाल की प्रमुख कार्रवाइयों में शामिल रहा।
डकैती से लेकर कर्फ्यू तक, कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां
गुना में पुलिस अधीक्षक रहते हुए हनुमान टेकरी डकैती मामले में पुलिस टीम का नेतृत्व किया और 12 किलोग्राम चांदी बरामद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिंगरौली में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहते हुए तीन दिवसीय कर्फ्यू के दौरान पुलिस बल का नेतृत्व किया।
धार में भोजशाला क्षेत्र में रंगपंचमी का आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए विभिन्न धार्मिक समूहों के साथ समन्वय स्थापित किया।
वर्ष 2016 में उज्जैन सिंहस्थ के दौरान उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा सिंहस्थ ज्योति पदक से सम्मानित भी किया गया।
अब सागर की जिम्मेदारी, जनता की क्या हैं उम्मीदें?
ग्वालियर की 14वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल में सेनानी के पद पर पदस्थ रहे संजीव कुमार सिन्हा को अब सागर जिले की कमान सौंपी गई है।
उनके सामने जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों पर नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, नशे और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने तथा आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित निराकरण करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
तीन दशक से अधिक का अनुभव और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का उनका सफर अब सागर में किस तरह नजर आता है, यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल सागर की जनता की निगाहें अपने नए पुलिस कप्तान पर हैं।








