नगर में कानफोड़ू साइलेंट लगाकर पटाखे फोड़े रहे बाइक सवार सड़कों पर दहशत लोगों को हो रही परेशानी
परेशानी – प्रतिबंध के बाद भी वाहन में लगवा रहे मॉडिफाइड साइलेंसर लोगों की नींद उड़ रही चैन खो रहा दिल और दिमाग हो रहे बीमार लेकिन पुलिस नहीं कर रही कोई कार्रवाई
रिपोर्ट – विशाल रजक
तेंदूखेड़ा। मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर नगर की सड़कों पर फरटि भरते बुलेट सवार राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बने हुए है। प्रतिबंधित साइलेंसर लगाकर कानफोड़ देने वाली आवाज के साथ सड़कों पर भागते इन बाइक सवारों पर अंकुश लगाना बेहद जरुरी है बेलगाम बाइकों की तेज आवाज सड़क दुर्घटनाओं की वजह बन रही है। दरअसल तेज आवाज और पटाखों की गूंज से सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालक
अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार होते है। खासकर बुजुर्ग और महिलाएं इन बाइक सवारों से परेशान है तेन्दूखेड़ा पुलिस द्वारा ऐसे बाइक सवारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन आज तक पुलिस द्वारा इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिसके कारण बुलेट चालकों के हौसले बुलंद हैं और नगर में आतंक मचा रहे हैं
पटाखे की आवाज करती है तंग
नगर में दर्जनों मनचले युवक हैं, जिन्होंने मॉडिफाई साइलेंसर के
साथ अपनी बुलेट के साइलेंसर में पटाखे की आवाज निकालने वाली मशीनरी फिट करवा रखा है। उनके द्वारा नगर के अलग-अलग क्षेत्र में भ्रमण के दौरान खासतौर पर जब कालेज एवं स्कूलों की छात्राएं एवं युवतियाँ सड़क पर होती हैं तो उनके पास पहुँचते ही पटाखे की आवाज निकालते हैं जिससे आम राहगीरों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो ऐसी स्थिति हो जाती है कि पटाखे की आवाज निकालने की वजह से लोग सकते में आ जाते हैं लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती है
धीरे-धीरे कम होने लगती है सुनने की क्षमता
नगर के डॉक्टर्स का कहना है कि साउंड तो कोई भी हो जो तय लेवल से ऊपर जाता है, वह कानों के लिए नुकसानदायक ही है। हम आपस में बात करते हैं, उसका लेवल 50-60 डेसिबल तक जाता है, लेकिन प्रेशर हॉर्न या मॉडिफाइड साइलेंसर का साउंड 80-90 डेसिबल या उससे अधिक जाता ही है। इनसे सीधा नुकसान नहीं होता, लेकिन लगातार इनकी आवाज कानों तक पहुंचने से सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। सीधे कहें तो दो तरह से हमारे सुनने की शक्ति कम होने लगती है। पहला या तो साउंड लेवल एकदम हायर मिले या फिर थोड़ा कम लेवल बार-बार मिलता रहे, ये दोनों ही परिस्थितियां हमारे लिए नुकसानदायक हैं
संकरी गली-मोहल्ले के लोग परेशान
नगर की मुख्य सड़कों के अलावा बाइक सवार गली-मोहल्लों की संकरी गलियों में पटाखे फोड़ते है। जिसकी आवाज दोगुनी हो जाती है। ऐसे असामाजिक तत्वों से रहवासी खासे परेशान है। बाइक सवार रात के वक्त स्टंट करते हैं। जिससे लोगों की नींद में खलल पैदा होती है
क्या कहता है नियम
(1)- मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने पर जुर्माना और जेल हो सकती है
(2)- मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत अगर कोई वाहन 80 डेसिबल से ज्यादा शोर पैदा करता है, तो उस पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल हो सकती है।
(3)- मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने से ध्वनि प्रदूषण होता है।
(4)- ऐसे साइलेंसर से होने वाला शोर वाहनों के आस-पास ध्यान भटकाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है
(5)- खराब साइलेंसर से वाहन झुक सकता है या रुक सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा हो सकता है
ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख दुष्प्रभाव
सुनने की क्षमता में कमी
लम्बे समय तक 85 डेसिबल से अधिक ध्वनि के सम्पर्क में रहने से सुनने की क्षमता कम हो सकती है। इससे बहरापन हो सकता है
मानसिक तनाव
ध्वनि प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है इससे तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन और अवसाद हो सकता है
नींदचक्र में गड़बड़ी:
रात में अधिक शोर से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे मानसिक असंतुलन हो सकता है।
हृदय सम्बंधी समस्याएं
ध्वनि प्रदूषण उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ाता है
याददाश्त में कमी
बच्चों और वृद्धों में एकाग्रता, स्मृति और ध्यान प्रभावित हो सकता है। चिड़चिड़ापन और आक्रामकता, लगातार शोर चिड़चिड़ापन और आक्रामकता को बढ़ावा दे सकता है।
वन्यजीवों पर प्रभाव
ध्वनि प्रदूषण पशुओं के व्यवहार, संचार, प्रजनन और प्रवास को प्रभावित करता है
जल्द होगी कार्रवाई एसडीओपी
इस संबंध में तेंदूखेड़ा एसडीओपी अर्चना अहीर का कहना है कि इस मामले में पुलिस शीघ्र ही कार्रवाई करेगी जो बुलेट मोटरसाइकिल में साउंड की गति ज्यादा है ऐसे में उन पर कार्रवाई की जाएगी साथ ही स्कूल समय में भी पुलिस स्कूल खुलने पर सुबह शाम गस्त करेगी
अर्चना अहीर एसडीओपी तेंदूखेड़ा दमोह








