होम देश / विदेश मध्यप्रदेश राजनीति धर्म/अध्यात्म ऑटोमोबाइल सरकारी योजना खेल समाचार
By
On:

हर स्कूल में अनिवार्य हो बॉक्सिंग, पंचायतों में बनें मिनी स्टेडियम: सतीश कुमार

हर स्कूल में अनिवार्य हो ...

[post_dates]

Sub Editor

Published on:

whatsapp

हर स्कूल में अनिवार्य हो बॉक्सिंग, पंचायतों में बनें मिनी स्टेडियम: सतीश कुमार

टोक्यो ओलंपिक में अपनी बहादुरी से देश का दिल जीतने वाले बुलंदशहर के लाल और अर्जुन अवार्डी बॉक्सर सतीश कुमार का मानना है कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी में बॉक्सिंग की अपार संभावनाएं हैं। हाल ही में हुई झांसी में खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव से एक विशेष बातचीत में उन्होंने प्रदेश में खेल के भविष्य और जमीनी स्तर पर सुधारों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी।

प्रश्न 1: उत्तर प्रदेश में बॉक्सिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आप क्या जरूरी मानते हैं?

सतीश कुमार: देखिए, हमारे प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। अगर हमें बॉक्सिंग को वास्तव में ‘पर’ (पंख) लगाने हैं, तो हमें बुनियादी ढांचे पर काम करना होगा। मेरा मानना है कि ग्राम पंचायतों के स्तर पर तीन-चार गांवों के समूह के बीच एक मिनी स्टेडियम होना चाहिए। सिर्फ स्टेडियम बनाने से काम नहीं चलेगा, वहां एक पेशेवर बॉक्सिंग कोच की नियुक्ति भी अनिवार्य है। जब बच्चों को अपने घर के पास ही सही तकनीक सीखने को मिलेगी, तभी वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक पाएंगे।

प्रश्न 2: आपने स्कूलों में बॉक्सिंग को अनिवार्य करने की बात कही है, इसके पीछे क्या सोच है?

सतीश कुमार: बिल्कुल। स्कूल वह जगह है जहां बच्चे का आधार तैयार होता है। जैसे अन्य खेल या विषय पढ़ाए जाते हैं, वैसे ही बॉक्सिंग को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे न केवल बच्चों में अनुशासन और आत्मरक्षा की भावना आएगी, बल्कि हम बहुत कम उम्र में ही टैलेंट को पहचान सकेंगे।

प्रश्न 3: ग्रामीण परिवेश के खिलाड़ियों के लिए आपका क्या संदेश है?

सतीश कुमार: मैं खुद एक ग्रामीण परिवेश से आता हूँ। आज हमारे देश के कई नामचीन खिलाड़ी गांवों से ही निकलकर आए हैं और देश के लिए मेडल जीत रहे हैं। ग्रामीण युवाओं में स्वाभाविक मजबूती और संघर्ष करने की क्षमता होती है। बस जरूरत है उन्हें सही मंच और सही समय पर मार्गदर्शन मिलने की। अगर सुविधाएं गांवों तक पहुँच गईं, तो यूपी का हर जिला एक चैंपियन बॉक्सर देगा।

सवाल: टोक्यो ओलंपिक के वे 13 टांके और आपका जज्बा आज भी चर्चा में रहता है..

सतीश कुमार: मुस्कुराते हुए कहते है एक फौजी और एक बॉक्सर कभी हार नहीं मानता। शरीर पर चोट थी, पर हौसला बुलंद था। मेरा मानना है कि खिलाड़ी को अपनी परिस्थितियों का रोना नहीं रोना चाहिए, बल्कि अपनी मेहनत से उन्हें बदलना चाहिए।

Join our WhatsApp Group
Sub Editor

मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
error: RNVLive Content is protected !!