सारसबगली चौकी में आयोजित हुई “चीता चौपाल” ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दी गई जानकारी
तेंदूखेड़ा। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की सर्रा रेंज अंतर्गत सारसबगली चौकी में “चीता चौपाल” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को वन, वन्यजीवों तथा विशेष रूप से चीतों के संरक्षण एवं उनके व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराना था।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को वन्य प्राणियों, पशु-पक्षियों एवं पेड़-पौधों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रोजेक्टर एवं प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जंगल में पाए जाने वाले विभिन्न वन्यजीवों जैसे चीता, बाघ, भालू, रीछ, सियार आदि की पहचान कराई गई। साथ ही क्षेत्र में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण वनस्पतियों एवं औषधीय पौधों जैसे सागौन, बीजा, महुआ, हर्रा, बहेरा, आंवला सहित अन्य जड़ी-बूटियों के बारे में भी ग्रामीणों को अवगत कराया गया।
चीता चौपाल का मुख्य उद्देश्य वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की बसाहट को सफल बनाना तथा आसपास के ग्रामीणों में चीतों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस अवसर पर ग्रामीणों को चीतों की पहचान, उनकी जीवन शैली, व्यवहार तथा मानव-वन्यजीव द्वंद से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया गया कि चीता सामान्य परिस्थितियों में मनुष्यों पर हमला नहीं करता, जब तक कि उसे उकसाया न जाए। ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि यदि किसी क्षेत्र में चीता दिखाई दे तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचना दें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
कार्यक्रम में वनरक्षक पीयूष सिहारे एवं रघुवीर काछी द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण में जनसहभागिता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर परिक्षेत्र सहायक सारसबगली लाखन अहिरवार, वनरक्षक रितेश कुमार पटेल, रूप सिंह राय, सुरक्षा श्रमिक मोहन कुर्मी, हेमंत पटेल, सुदामा यादव, श्रीराम एवं पुनीत ठाकुर सहित वन विभाग का स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा वन्यजीव संरक्षण संबंधी जानकारी प्राप्त की।








