धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का हमला, खड़गे बोले- सच्चाई की जीत, मोदी की ज़िद की हार
शिक्षा मंत्री के फैसले के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरा, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर जवाबदेही और माफी की मांग
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा गया, “नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं। अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता।”
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी प्रधान के इस्तीफे को काफी देर से लिया गया फैसला बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था। खेड़ा ने इसे “एक दिन की देरी और कमज़ोर कोशिश” बताते हुए कहा कि आखिरकार देश को इस परेशानी से राहत मिली है और इसके लिए भारत की जनता को बधाई दी।
खड़गे बोले- छात्रों की आवाज पहुंची, यह मोदी सरकार की जिद की हार
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे देश के युवाओं और सच्चाई की जीत करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के छात्रों की आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंच गई है।
खड़गे ने कहा कि यह मोदी सरकार की जिद की हार है। उन्होंने इस फैसले को उन परिवारों की जीत भी बताया, जिन्होंने अपने लोगों को खोया है। साथ ही उन्होंने कहा कि भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ विपक्ष ने सड़कों से लेकर संसद तक जो संघर्ष किया, यह उसकी भी जीत है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को युवा पीढ़ी से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने निहत्थे छात्रों पर लाठी और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
अधीर रंजन चौधरी ने इस्तीफे के समय पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह फैसला काफी पहले लेना चाहिए था। चौधरी के मुताबिक, अगर पहले ही कदम उठाया जाता तो कई अप्रिय घटनाओं को टाला जा सकता था।
उन्होंने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन, आंसू गैस और लाठीचार्ज के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि इन हालात से बचा जा सकता था। चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार ने दबाव और घबराहट की स्थिति में प्रधान से इस्तीफा लिया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हताशा में अपने ही मंत्री को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया है।
धर्मेंद्र प्रधान बोले- मामला निजी प्रतिष्ठा का नहीं
लाखों छात्रों के भविष्य और देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बीते दस दिनों में सामने आए घटनाक्रम, छात्रों के विरोध और विपक्ष के लगातार हमलों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह मामला किसी निजी प्रतिष्ठा से जुड़ा नहीं था। प्रधान ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले दस दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें काफी परेशान किया है।
हालांकि, प्रधान के इस्तीफे के बाद भी विपक्ष का हमला थमा नहीं है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसे नैतिक जिम्मेदारी के तहत लिया गया फैसला मानने के बजाय सरकार पर बने दबाव का नतीजा बता रहे हैं।
इस्तीफे के बाद भी NEET विवाद पर सवाल बरकरार
धर्मेंद्र प्रधान के पद से हटने के बाद भी NEET विवाद और देश की परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल खत्म नहीं हुए हैं। छात्रों और युवाओं की ओर से इन मुद्दों पर जवाबदेही की मांग बनी हुई है।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन विवादों के बीच आगे क्या कदम उठाती है और परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों का समाधान किस तरह किया जाता है।








