MP किसानों के लिए नई राह : पारंपरिक खेती छोड़, कमाई बढ़ाने का प्लान तैयार
भोपाल/रायसेन। रायसेन के दशहरा मैदान में आयोजित राष्ट्रीय कृषि महोत्सव के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती में बदलाव की दिशा तय करते हुए नया कृषि रोडमैप जारी किया। यह योजना फिलहाल सीहोर, रायसेन, विदिशा और देवास जिलों के लिए तैयार की गई है, जिसमें इन इलाकों में लंबे समय से प्रमुख रही गेहूं, धान और सोयाबीन जैसी फसलों के साथ-साथ अब फल और सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। बताया गया कि इसी तरह की योजनाएं जल्द ही देश के अन्य जिलों के लिए भी लागू की जाएंगी।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने की जरूरत
कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब समय आ गया है जब किसानों को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेहूं, धान और सोयाबीन के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाना जरूरी है, ताकि खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके। साथ ही उन्होंने वैल्यू एडिशन और बाजार की मांग के अनुसार कृषि प्रणाली विकसित करने पर भी बल दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों में सिंचाई के लिए ज्यादातर भूजल पर निर्भरता है, जबकि कई जगहों पर जल स्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है। इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और उत्पादों के मूल्य संवर्धन की कमी भी बड़ी चुनौतियों के रूप में सामने आ रही है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फसल विविधीकरण की दिशा में यह रोडमैप तैयार किया गया है।
फल और सब्जियों में नई संभावनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में टमाटर, प्याज, लहसुन, भिंडी और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों की खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। इसके साथ ही अनार जैसे फलों की खेती भी यहां बेहतर परिणाम दे सकती है। उन्होंने किसानों को ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो जैसी अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की ओर भी ध्यान देने की सलाह दी।
उनका कहना था कि यदि वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाकर संसाधनों का सही उपयोग किया जाए और फसल विविधीकरण को अपनाया जाए, तो किसानों की आमदनी में बड़ा इजाफा संभव है। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना और स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी उपस्थित रहे।
हर ब्लॉक में बनेंगे बीज ग्राम
शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम 10 गांवों को ‘बीज ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन गांवों में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर फसल के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज मिल सकें। इस कार्य में आईसीएआर संस्थान भी सहयोग करेगा और ब्रीडर सीड उपलब्ध कराएगा।
वैज्ञानिकों का किसानों से सीधा जुड़ाव
उन्होंने कहा कि भोपाल और आसपास स्थित आईसीएआर संस्थानों, कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों को आपस में जोड़कर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस व्यवस्था के जरिए वैज्ञानिक सीधे किसानों के संपर्क में रहेंगे और उन्हें समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
क्लीन प्लांट सेंटर और मशीन बैंक की तैयारी
किसानों को रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश में भी एक केंद्र स्थापित किया जा सकता है।
इसके साथ ही पंचायत स्तर पर मशीन बैंक स्थापित करने और प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम पांच कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने की योजना है। इससे किसानों को खेती से जुड़ी मशीनें सस्ती दरों पर और समय पर मिल सकेंगी, जिससे उनकी लागत कम होगी और काम आसान बनेगा।








