झलौन रेंज में धड़ल्ले से कट रहे सागौन के पेड़, वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
अवैध कटाई – तेंदूखेड़ा झलौन हाईवे सहित धनेटा मार्ग पर दर्जनों पेड़ की कटाई नजर आ रहे ठूंठ नहीं थम रही अवैध कटाई वनकर्मियों एवं अधिकारियों की सांठगांठ से जारी है अवैध कटाई अगर जांच हो रहे चारों ओर मिल जाएंगे दर्जनों संख्या में पेड़ों के ठूंठ
रिपोर्ट – विशाल रजक
तेंदूखेड़ा। जिस तरह क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई जारी है, उसे देखते हुए पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन और वन विभाग के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। हालात ये हैं कि जो क्षेत्र कभी पेड़ों की हरियाली से लहलहा रहे थे, अब वहां खाली मैदान नजर आ रहा है। गौर करने वाली बात ये है कि जंगल की रखवाली के लिए वन अमला तैनात है लेकिन इसके बाद भी पेड़ लगातार कट रहे हैं, जिससे कहीं न कहीं संबंधितों की मिलीभगत उजागर हो रही है। जिले के उप-वन मंडल तेंदूखेड़ा के झलौन वन परिक्षेत्र में बड़ी संख्या में माफिया सक्रिय बताए जा रहे हैं लेकिन ये वन विभाग को नजर नहीं आ रहे हैं दरअसल झलौन वन परिक्षेत्र में चारों ओर बड़े पैमाने पर हरे भरे पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है गौर करने वाली बात ये है कि पेड़ों को काटने के बाद जो ठूंठ बच रहे हैं, वह जिम्मेदारों को नजर नहीं आ रहे हैं। जहां शासन-प्रशासन द्वारा एक ओर वनों की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं नए प्लांटेशन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उनकी सुरक्षा के लिए वनरक्षक व चौकीदारों को भी रखा गया है। लेकिन इसके बाद भी पेड़ों की अवैध कटाई होना सुरक्षा में तैनात जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रहा है

हाईवे व मुख्य मार्गों पर हो रही कटाई अंदर नजर आ रहे ठूंठ
वन माफिया के निशाने पर सागर जबलपुर स्टेट हाईवे 15 है। जहां झलौन तेंदूखेड़ा मार्ग व हाईवे किनारे लगे वर्षों पुराने सागौन सहित कीमती पेड़ों पर रात के समय आरा मशीन चल रही है। गौर करने वाली बात ये हैं कि इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी अंजान है सागर झलौन स्टेट हाईवे मार्ग पर दोनों और आधा दर्जन से अधिक पेड़ों को कटा हुआ देखा जा सकता है, जो हाईवे किनारे लगे हुए थे। इन पेड़ों को माफियाओं द्वारा रात में काटना बताया जा रहा है। जिन्हें लकड़ी काटने वाली मशीन से काटा गया है इसके अलावा धनेटा मार्ग पर बड़ी संख्या में सड़क किनारे पेड़ काटे जा रहे हैं जिस स्थान पर यह कटाई की गई वह झलौन वन परिक्षेत्र एवं तेंदूखेड़ा वन परिक्षेत्र की सीमा से लगा हुआ क्षेत्र है। जिस कारण अधिकारियों द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण प्रेमियों का कहना है कि यदि इसी तरह जंगल एवं हाईवे किनारे लगे पेड़ों को काटा जाता रहा तो जिले में एक पेड़ मां के नाम अभियान का सफल होना मुश्किल है। इधर सफाया हो रहे जंगलों का खामियाजा जंगली जानवरों को भी भुगतान पड़ रहा है। जानवर जंगल छोड़कर हाईवे पर आने लगे हैं और वाहन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। बता दें कि तेंदूखेड़ा वन परिक्षेत्र की तिपनी बीट में वर्ष 2020 में वन माफियाओं द्वारा रातों रात हजारों की संख्या में सालों पुराने पेड़ों की कटाई की थी। जिसके बाद वन विभाग के बड़े अधिकारियों में हड़कंप मच गया था और सागर सीसीएफ, दमोह डीएफओ भी मौके पर पहुंचे थे। करीब एक सप्ताह तक तक पेड़ों की गिनती चलती रही, लेकिन बाद में फाइल दबा कर रह गई और कागजों में कार्रवाई
सभी. प्रजाति के हैं ठूंठ
कटे पेड़ों की गौर से इन बीटो में गणना कराई जाये तो इनकी गणना सैकड़ों हरे भरे पेड़ों मे होगी जिनकी रखवाली में पूरा वन अमला लगा है सवाल यह उठता है कि जंगल रखने के लिए सुरक्षा -श्रमिक, स्थाई, कर्मी, वनकर्मी, डिप्टी रेजर, रेंजर के अलावा वन समितियों के अध्यक्ष लगे है। उसके बाद भी उन्ही जगहों पर सबसे ज्यादा कटाई हो रही है और यह लोग माफियाओं को पकड़ने में असफल है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह खेत किनारे निकलने पर जंगल से काटे गये हरे-भरे पेड़ों के खंबे यहां की शोभा बड़ा रहे है। दूसरी तरफ जंगल में उनके बचे ठूंठ दिखाई दे रहे है, इससे साफ जाहिर होता है किं इस कटाई कार्य में वन अमला पूरी तरह लिप्त है

अवैध कटाई के गवाह बने ठूंठ
झलौन वन परिक्षेत्र में वन माफियाओं द्वारा बड़ी संख्या में सागौन सहित अन्य पेड़ों को काटा गया है। जहां पेड़ों की कटाई के बाद बचे ठूंठ और जहां-तहां पड़ी टहनियां इसकी गवाही दे रही हैं। हालांकि ये सब वन विभाग को नजर नहीं आता है। यदि स्थानीय लोगों की माने तो झलौन वन परिक्षेत्र की हर बीट में माफिया बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काट कर जंगल में सफाया करने में लगे हुए हैं। माफिया बेफिक्र होकर पेड़ों को काटते हैं और – परिवहन कर ले जाते हैं लेकिन वनों की सुरक्षा के लिए तैनात वन अमला को ये नजर नहीं आ रहा है। आरोप है कि झालौन के साथ ही उप वन मंडल तेंदूखेड़ा की अन्य रेंज और बीटों में इसी तरह की अवैध कटाई जारी है। झलौन वन परिक्षेत्र में लगातार ही पेड़ो कटाई के मामले सामने आ रहे हैं
अमला की तैनाती के लिए चौकी बनी शोपीस
बता दें कि बीटों में वन कर्मियों की तैनाती के लिए चौकी भी बनी हुई है, लेकिन उनमें कोई भी कर्मी मौजूद नहीं रहता है। जिसका फायदा भी माफिया उठा रहे हैं। जबकि कायदे से अपनी ड्यूटी समय चौकी में परिक्षेत्र अधिकारी, बीटगार्ड आदि को रहना चाहिए। हालांकि वन अधिकारी रात में गश्ती का दावा तो करते हैं, लेकिन जिस तरह पेड़ों को काटा जा रहा है, उससे अधिकारियों की गश्ती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारी झलौन रेंज की सभी वीट का निरीक्षण करें तो यहां सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई होने के सबूत मिल सकते हैं, लेकिन अधिकारी ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि उनकी भी मिलीभगत की बात सामने आ रही है।

मैं दिखवाता हूं
जब इस संबंध में झलौन वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीहा से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं दिखवाता हूं, कहां पर कटाई हो रही है। यदि सागौन को अवैध रूप से काटा जाना पाया गया तो वनरक्षक पर कार्रवाई की जाएंगी








