आंखों से दुनिया नहीं देख पाए सुनील, लेकिन आवाज ने पहुंचाया ‘हनुमान अंश’ तक
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई…बना लोगों की पसंद, सोशल मीडिया पर जमकर बन रहे रील्स
सागर। कहते हैं कि अगर इंसान के भीतर हुनर हो और आगे बढ़ने का जज्बा मजबूत हो तो जिंदगी की बड़ी से बड़ी मुश्किल भी उसकी राह को हमेशा के लिए नहीं रोक सकती। सागर जिले की सुरखी विधानसभा के छोटे से गांव अगरा निवासी 25 वर्षीय सुनील सिंह लोधी की कहानी भी संघर्ष, विश्वास और सफलता की ऐसी ही प्रेरणादायक है। सुनील बचपन से अपनी आंखों से दुनिया नहीं देख पाए, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। भजन और संगीत के प्रति उनका लगाव ही धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। आज उनकी आवाज गांव की चौपालों और छोटे धार्मिक आयोजनों से निकलकर मुंबई के स्टूडियो और फिल्मी दुनिया तक पहुंच चुकी है। इन दिनों बाबा नीम करौली महाराज के जीवन और आस्था से जुड़े विषय पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ चर्चा में है। फिल्म में शामिल भजन गीत- मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई…लोगों के बीच खासा पसंद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस भजन पर बड़ी संख्या में रील्स भी बन रही हैं। राज एक्सप्रेस संवाददाता बृजेंद्र रैकवार ने सुनील सिंह लोधी और उनके संघर्ष के साथी रोहित साहू से विशेष बातचीत की। इस दौरान सुनील ने अपने बचपन, संघर्ष, संगीत की शुरुआत, सोशल मीडिया से मिली पहचान और मुंबई से लेकर फिल्म ‘हनुमान अंश’ तक पहुंचने के सफर को साझा किया।
इलाज कराया, लेकिन आंखों की रोशनी नहीं लौटी
सुनील बताते हैं कि उन्हें बचपन से दिखाई नहीं देता। माता-पिता ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार कई जगह उनका इलाज कराया, लेकिन आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।सुनील कहते हैं- मेरे माता-पिता ने बहुत कोशिश की। जहां तक उनकी क्षमता थी, वहां तक मेरा इलाज कराया, लेकिन शायद ईश्वर को यही मंजूर था। मैं दुनिया को अपनी आंखों से नहीं देख पाया, लेकिन आज लोगों का प्यार मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी रोशनी है। उनके परिवार में माता-पिता और दो भाई-बहन हैं। परिवार के पास करीब दो एकड़ जमीन है और पशुपालन भी आय का एक सहारा है। आर्थिक परिस्थितियां सामान्य होने और दृष्टिबाधित होने के कारण उनकी पढ़ाई अधिक आगे नहीं बढ़ सकी।
स्कूल से शुरू हुआ भजन गाने का सफर
सुनील को बचपन से ही भजन और गीत गाने का शौक था। स्कूल में शिक्षक भी अक्सर उनसे कोई भजन सुनाने के लिए कहते थे। सुनील गाते और लोग मोबाइल में उनकी आवाज रिकॉर्ड कर लेते। यहीं से संगीत के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा। धीरे-धीरे गांव में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में उन्हें भजन गाने के लिए बुलाया जाने लगा। उन्होंने तंबूरा बजाना भी सीखा और भजन गायन उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि गांव के छोटे आयोजनों में गाई जाने वाली यही आवाज एक दिन लाखों लोगों तक पहुंचेगी।
2019 में रोहित साहू से मुलाकात ने बदली जिंदगी
सुनील के जीवन में बड़ा मोड़ वर्ष 2019 में आया। उनके पड़ोस में रहने वाली एक चाची का मायका तालचिरी गांव में था। उन्होंने सुनील को बताया कि उनके भाई रोहित साहू सोशल मीडिया पर ‘बुंदेली दुनिया’ नाम से पेज पर वीडियो अपलोड करते हैं। अगस्त 2019 में रोहित साहू अपनी बहन के घर अगरा गांव आए। इसी दौरान उनकी मुलाकात सुनील से हुई। रोहित ने सुनील की आवाज सुनी और उनके वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू किया। इसके बाद सुनील का बुंदेली गीत “दूल्हा बनकर आ गव ठेला, है मोटर को ब्याव…” यूट्यूब पर लोगों तक पहुंचा। सुनील के अनुसार, इस गीत को करीब 9 लाख लोगों ने देखा, जिसके बाद उनकी पहचान गांव और क्षेत्र में तेजी से बढ़ने लगी। सुनील कहते हैं-रोहित को मैं मामा कहता हूं। उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया। अगर वह मेरे जीवन में नहीं आते और मेरा हाथ नहीं पकड़ते तो शायद आज भी मैं अपने गांव में गुमनाम रहता।
सोशल मीडिया ने पहुंचाई आवाज लाखों लोगों तक
वीडियो वायरल होने के बाद सुनील को धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भजन गाने के लिए बुलाया जाने लगा। धीरे-धीरे उन्हें कार्यक्रमों से पारिश्रमिक भी मिलने लगा, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ। इस दौरान सुनील और रोहित साहू ने मोबाइल से कई भजन रिकॉर्ड किए। इसी क्रम में मोरे संकट के कटैया हनुमान…भजन भी रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया। भजन की लोकप्रियता के बाद इंदौर के पंकज वीआरके प्रोडक्शन से संपर्क हुआ और सुनील को रिकॉर्डिंग के लिए इंदौर बुलाया गया। वहां बेहतर तकनीकी व्यवस्था के साथ भजन रिकॉर्ड किया गया और बाद में यूट्यूब पर जारी किया गया। सुनील के अनुसार, यह भजन करीब 28 मिलियन लोगों तक पहुंचा। इसके बाद उनकी आवाज मध्य प्रदेश के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में भी पहचानी जाने लगी।

मुंबई पहुंचे और खुल गया फिल्मी दुनिया का रास्ता
सुनील की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। इसी दौरान मुंबई के स्टूडियो से भजन रिकॉर्ड करने का अवसर मिला। रोहित साहू सुनील को पहली बार मुंबई लेकर पहुंचे। मुंबई में साईं बाबा स्टूडियो में रिकॉर्डिंग हुई और सुनील के लिए जिंदगी के नए रास्ते खुलने लगे। लेकिन मुंबई पहुंचने के बाद एक ऐसा संयोग बना, जिसने उन्हें सीधे फिल्म ‘हनुमान अंश’ तक पहुंचा दिया।
वर्सोवा बीच की तस्वीर और निर्देशक का संदेश
रिकॉर्डिंग के बाद रोहित साहू का मन वर्सोवा बीच घूमने जाने का हुआ। उन्होंने सुनील से कहा कि मुंबई इतनी दूर आए हैं तो समुद्र किनारे भी घूमना चाहिए। दोनों वर्सोवा बीच पहुंचे और वहां कुछ तस्वीरें लीं। रोहित ने इन तस्वीरों को अपने ‘बुंदेली दुनिया’ इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट कर दिया। यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया।तस्वीर देखने के बाद फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इंस्टाग्राम पर संदेश भेजकर पूछा कि क्या वे लोग मुंबई में हैं। रोहित ने जवाब दिया कि वे मुंबई में ही हैं। इसके बाद निर्देशक ने अपने स्टूडियो का पता भेजा। संयोग से स्टूडियो उनके होटल से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर था। रोहित और सुनील उसी रात स्टूडियो पहुंचे। वहां सुनील ने निर्देशक और फिल्म की टीम के सामने तीन-चार भजन सुनाए। इन्हीं भजनों में से एक था “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई” निर्देशक को यह भजन बेहद पसंद आया और इसे फिल्म ‘हनुमान अंश’ में शामिल करने का निर्णय लिया गया। आज यही भजन फिल्म के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लोगों की पसंद बना हुआ है और इस पर बड़ी संख्या में रील्स बनाई जा रही हैं।
अगर रोहित मामा नहीं होते तो शायद गुमनाम रहता
सुनील अपने संघर्ष के साथी रोहित साहू का नाम लेते ही भावुक हो जाते हैं। वह कहते हैं-मेरे जीवन के संघर्ष में रोहित मामा का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा, मेरे वीडियो बनाए, मुझे लोगों तक पहुंचाया और हर जगह मेरे साथ खड़े रहे। अगर वह मेरे साथ नहीं होते तो शायद मैं आज भी अपने गांव में गुमनाम रहता।
जब रास्ता भटक गए तो भंवरे ने पहुंचाया घर
सुनील ने बातचीत के दौरान अपने जीवन का एक बेहद भावुक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक दिन वह अकेले घर के बाहर गए थे। घर के पास ही एक नाला था और दिखाई नहीं देने के कारण वह रास्ता भटक गए। करीब आधे घंटे तक वह परेशान रहे और समझ नहीं पा रहे थे कि घर किस दिशा में है। उस समय वह बेहद निराश हो गए और भगवान से भी शिकायत करने लगे। सुनील बताते हैं-उस समय मैं बहुत परेशान था। मन में आया कि भगवान ने मुझे कैसी जिंदगी दी है। मैं भगवान को भी बहुत कुछ कहने लगा था।इसी दौरान एक भंवरा उनके आसपास मंडराने लगा। सुनील बताते हैं कि भंवरे की आवाज जिस दिशा में जाती, वह उसी दिशा में उसके पीछे चलते गए।कुछ देर बाद वह अपने घर तक पहुंच गए। घर पहुंचकर स्नान करने के बाद जब वह भगवान की पूजा करने बैठे तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए। सुनील कहते हैं- मैं सोचने लगा कि भगवान ने तो मुझे भंवरे के रूप में रास्ता दिखाकर घर पहुंचा दिया और मैं उन्हें ही भला-बुरा कह रहा था। उस दिन के बाद उनके भीतर ईश्वर के प्रति विश्वास और भी मजबूत हो गया।
जुबिन नौटियाल के साथ गाना गाने का सपना
सुनील सिंह लोधी की जिंदगी का सफर गांव से निकलकर मुंबई और फिल्म ‘हनुमान अंश’ तक पहुंच चुका है, लेकिन उनके सपनों का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। सुनील की सबसे बड़ी इच्छा देश के प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल के साथ एक गीत गाने की है।
वह कहते हैं कि जुबिन नौटियाल की गायकी उन्हें बेहद पसंद है और यदि कभी उन्हें उनके साथ गाने का अवसर मिला तो यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा होने जैसा होगा।
शादी की इच्छा भी है, मिले समझदार जीवनसाथी
बातचीत के दौरान जब सुनील से विवाह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि शादी करने की इच्छा तो है।उन्होंने कहा-जीवनसाथी ऐसी हो जो मुझे और मेरी परिस्थितियों को समझ सके। मैं देख नहीं सकता, इसलिए मेरे जीवन को समझने वाली अच्छी साथी मिलेगी तो जरूर शादी करूंगा।








