सागर : कागजों में संभागीय दर्जा, हकीकत में स्टाफ शून्य ,एक चिकित्सक पर टिकी पूरी पशु स्वास्थ्य व्यवस्था !
सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिला मुख्यालय स्थित संभागीय पशु चिकित्सालय इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। कागजों में संभागीय स्तर का दर्जा प्राप्त यह अस्पताल जमीनी स्तर पर मात्र एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 50 से 60 पशुओं की ओपीडी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर रूप से बीमार पशुओं को भी उपचार के लिए यहीं रेफर किया जाता है। ऐसे में एकमात्र चिकित्सक पर ओपीडी, सर्जरी, सोनोग्राफी, पोस्टमार्टम एवं आपातकालीन सेवाओं की संपूर्ण जिम्मेदारी आ गई है।
सरकारी मानकों के अनुसार संभागीय पशु चिकित्सालय में तीन पशु चिकित्सक, तीन AVFO एवं तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदस्थापना अनिवार्य है। वर्तमान में यहां केवल एक पशु चिकित्सक एक AVFO तथा एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत हैं।
अस्पताल में पदस्थ एकमात्र चिकित्सक डॉ. अनुज शर्मा ने बताया कि स्टाफ की कमी के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, किंतु अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि संभागीय अस्पताल होने के कारण अवकाश के दिनों में भी सेवाएं जारी रहती हैं। ऐसे में यदि एकमात्र चिकित्सक को अवकाश लेना पड़े तो अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
पशुपालकों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल की यह स्थिति है, तो ग्रामीण पशु चिकित्सालयों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और ऐसी स्थिति में पशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा चिंताजनक है। संभागीय स्तर के अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।








