टाइगर रिजर्व में चीतों के गृहप्रवेश की फुल ट्रेनिंग जंगल के शिकारी के मिजाज पर नया क्रैश कोर्स
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जल्द होगी चीतों की शिफ्टिंग प्रबंधन ने 150 गांव में चीता चौपाल लगा देगा जंगल के तेजतर्रार शिकारी से डील करने की ट्रैनिंग

विशाल रजक / तेंदूखेड़ा। चीतों के तीसरे घर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के आगमन को लेकर तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं. चीतों के लिए जो निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, वो तो अलग बात है. लेकिन पहली बार चीतों से रूबरू होने जा रहे इस इलाके के लोगों को चीता, चीते के स्वभाव की जानकारियां देने के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन चीता चौपाल लगाने जा रहा है इसके लिए बाकायदा टाइगर रिजर्व के मैदानी अमले को प्रशिक्षित किया जा रहा है. इस प्रशिक्षण के बाद ये वनकर्मी टाइगर रिजर्व से जुड़े 150 गांव में चीता चौपाल लगाएंगे और लोगों को चीते के बारे में समझाएंगे. चीते के व्यवहार, चीतों से जंगल को होने वाले फायदे, चीतों के कारण पर्यटन व्यवसाय बढ़ने से मिलने वाले रोजगार की जानकारी देंगे।

वनकर्मियों और आम लोगों में संवाद स्थापित करने की कवायद
वनकर्मियों की ड्यूटी अलग तरह की होती है. उनका ज्यादातर वक्त जंगल में गुजरता है और रहवासी इलाकों से कम संपर्क होता है. ऐसे में कई बार वनकर्मियों और आम लोगों के बीच संवादहीनता की स्थिति बन जाती है. जो वनकर्मियों और आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनती है. टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि’आमतौर पर वनकर्मी और खासकर फ्रंटलाइन स्टाफ फारेस्ट गार्ड, फारेस्टर या सुरक्षा श्रमिक होते हैं. इनका काम पेट्रोलिंग करना, आब्जर्बेशन और फिर जंगल में होने वाले विकास कार्य करवाना होता है जंगल में रहने के कारण आम लोगों के साथ उनका संपर्क कम हो जाता है. लेकिन जैसे-जैसे समाज में बातपरिस्थितियां बदल रही है. टाइगर रिजर्व में वो चुनौतयां तो नहीं आयी, लेकिन मध्य प्रदेश के दूसरे वन क्षेत्रों में देखने मिलता है कि वन्यप्राणी कई बार ग्रामीण इलाकों में रहवासी क्षेत्रों में निकल जाते हैं. ऐसे में वहां मानव द्वंद्व की परिस्थितियां बनती है. ऐसे में हमें लगता है कि समुदाय के लोगों को वन और वन्यप्राणियों से जुड़े विषयों पर जागरूक करना और अपने साथ लाना है. तो इन सब चीजों के लिए हमें बेहतर संवाद स्थापित करने की जरूरत है।

पब्लिक स्पीकिंग के लिए प्रशिक्षण
टाइगर रिजर्व में इसी सोच को ध्यान रखते हुए वनरक्षक, डिप्टी रेंजर और सुरक्षा श्रमिकों को पब्लिक स्पीकिंग की ट्रैनिंग शुरू की गयी है. इसके लिए दो हफ्ते पहले एक प्रशिक्षण स्तर शुरू किया था, जिसमें भोपाल से स्पेशलिस्ट और पेंच टाइगर रिजर्व के कुछ वन्यकर्मियों को बुलाया गया था. पूरे दिन में बताया गया कि कैसे गांव के बच्चे, लोगों और महिलाओं से बात करें वनों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को कैसे समझाएं, वैज्ञानिक तथ्यों को कैसे सरल भाषा में बताएं. इन सारी चीजों को बताने के बाद हमारे 42 कर्मचारियों ने खुद प्रजेंटेशन दिया. इसका उद्देश्य यहीं था कि लोगों और वनकर्मियों के बीच संवाद स्थापित करना, वैज्ञानिक विषयों में उनकी पकड़ मजबूत बनाना है. हमारे यहां जल्द चीते आने वाले हैं और उसको लेकर लोगों को बहुत सारी भ्रांतियां है, उनको दूर करें. उसके लिए उन कर्मचारियों को जिनका संवाद कौशल बेहतर है, उनको मैदान में उतारा जाएगा

150 गांव में लगेगी चीता चौपाल
टाइगर रिजर्व में जुलाई माह में आने वाले चीतों को लेकर तैयारियां चल रही है. इसे ध्यान रखते हुए प्रबंधन ने चीता चौपाल की परिकल्पना की है. मई माह के मध्य से ये चौपाल शुरू करने का विचार है. प्रबंधन की तैयारी है कि एक दिन में पांच गांव में चीता चौपाल लगाएं और करीब एक माह के भीतर सभी 150 गांवों में चीता चौपाल लगाएंगे. जिसमें गांव के लोगों, बच्चों और महिलाओं को चीता के बारे में जानकारी दी जाएगी. जब इतने बड़े स्तर पर जनता के बीच में अभियान चलाना है, तो मैदानी अमले को प्रशिक्षित किया गया है. उनकी मदद से चीता चौपाल का अभियान संभाल पाएंगे
पर्यटन से होगा रोजगार सृजन
हम इन 150 गांव के लोगों को बताएंगे कि जिन लोगों ने कान्हा, पेंच और यहां के दूसरे टाइगर रिजर्व देखे होंगे. जहां पर पर्यटन से करोड़ों रूपए का वार्षिक रोजगार सृजित होता है. पेंच का करीब 140 करोड़ और कान्हा का करीब 200 करोड़ वार्षिक है. हमारे बुंदेलखंड की अलग चुनौतिया हैं, बारिश कम होती है और तमाम तरह की दिक्कते हैं. यहां के युवाओं को पर्यटन से रोजगार मिलने लगेगा, तो निसंदेह यहां की अर्थव्यवस्था और सामाजिक परिवेश में सुधार लाएंगे. मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का भी यही ध्येय है कि किस तरह हम वन्य प्राणियों का संरक्षण देश की खाद्य और जल सुरक्षा के लिए करें और साथ में वन्य प्राणी पर्यटन के जरिए लोगों को रोजगार और प्रदेश और देश के विकास में मदद मिले

चीता को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतिया
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि चीता एक ऐसा जानवर है, जिसको हमारी पीढ़ी में किसी ने नहीं देखा है. जो लोग चिड़ियाघर या कोई कूनो में जाकर देख आए हो, वो अलग बात है। लेकिन अगर इधर देखा जाए, तो कम ही संभावना है कि किसी ने चीता देखा हो. जब हम किसी को नहीं देखे हो और उसके बारे में जानते नहीं है, तो अंजाने का भय काफी ज्यादा रहता है कई बार लोग पूछते हैं कि वो चीता हमको दौड़ाएगें, तो हम क्या करेंगे. लेकिन तथ्य हम जानते हैं कि चीते ने आज तक किसी आदमी पर हमला नहीं किया है और ये उसकी प्रवृत्ति भी नहीं है कि एक इंसान पर हमला किया हो. इन सब विषयों को लेकर भ्रांतियां दूर करना है और लोगों को बताना है कि किस तरह हमारा टाइगर रिजर्व मध्यभारत में वन्यप्राणी संरक्षण और पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है








