सागर : शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर भारी असंतोष,शिक्षक संवर्ग ने सौंपा ज्ञापन
सागर। अपने अमानवीय और नीतिविरुद्ध फरमानों को लेकर पहले से ही विवादित लोक शिक्षण संचालनालय एक बार फिर विवादों से घिरा हुआ नजर आ रहा है। शिक्षा विभाग में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को सेवा जारी रखने के लिये शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता संबंधित यह फरमान जारी करके विभाग ने पुनः एक नये विवाद को जन्म दे दिया है जिसके विरोध में आज प्रदेश के समस्त जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपा गया है।
सागर जिला मुख्यालय पर शासकीय शिक्षक संगठन के नेतृत्व में एवं अन्य संगठनों के समर्थन में सौंपे गये ज्ञापन के उपरांत संगठन जिला अध्यक्ष आलोक गुप्ता ने अपने बयान में बताया कि लोकशिक्षण संचालनालय गौतम नगर भोपाल का संचालक लोकशिक्षण द्वारा हस्ताक्षरित आदेश की भाषा व लेख से यह स्पष्ट होता है कि इस विषय(TET परीक्षा पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश) के संबंध में आदेश जारी करने से पहले राज्य सरकार, मंत्रिमंडल एवं सचिवालय स्तर पर कोई भी संपर्क , सलाह एवं अभिमत तथा लिखित अनुमोदन संभवत: प्राप्त नहीं किया गया है, जो कि शासन नीति अनुसार लिया जाना अति आवश्यक था ।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा TET परीक्षा के संबंध में अपने दिए गए आदेश सिविल अपील 1385/2025 में याचक एक अशासकीय शिक्षण संस्था है तथा इसमें उत्तरदाता राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद नई दिल्ली है । उक्त आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद नई दिल्ली द्वारा आयुक्त लोकशिक्षण संचालनालय भोपाल मध्यप्रदेश को क्या आदेशित किया गया है ।
क्या राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद नई दिल्ली द्वारा सभी राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय गौतम नगर भोपाल को TET परीक्षा (पिछले 27 वर्षों से कार्य कर रहे शिक्षकों की) जुलाई माह में करने के लिए आदेश या निर्देश दिए गए हैं ।
मध्य प्रदेश के समस्त अध्यापक, माध्यमिक शिक्षक तथा प्राथमिक शिक्षक अपनी प्रथम नियुक्ति शिक्षाकर्मी एवं संविदा शिक्षक से होते हुए आए हैं जो की सेवा की निरंतर में है । शिक्षाकर्मी पद पर हुई हमारी नियुक्ति माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश प्रकरण क्रमांक सिविल अपील 4032/1995(मध्य प्रदेश शासन अन्य विरुद्ध दिनेश कुमार अन्य) आदेश दिनांक 21 अक्टूबर 1997 से हुई थी इस प्रकरण में मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नवीन संशोधित शिक्षा कर्मी भर्ती अधिनियम 1997 (25 सितंबर 1997) संलग्न कर जारी सेवा-शर्तों के आधार पर विधिवत रूप से भर्तियां की गई थी ।
उक्त भर्ती अधिनियम एवं शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1998 तथा अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 और राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग (भर्ती एवं सेवा की शर्तें)नियम 2018 में वर्णित सभी सेवा शर्तों में इस तरह की (TET परीक्षा को उत्तीर्ण किया जाना) कोई सेवा-शर्त राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग या आदिम जाती कल्याण विभाग अथवा मध्य प्रदेश शासन के किसी अन्य विभाग द्वारा उल्लेखित एवं वर्णित नहीं की गई थी ।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश क्र सिविल अपील 2634/2013 मैं यह आदेशित किया है कि किसी भी कर्मचारी की भर्ती की सेवा-शर्तें एवं नियम उसकी नियुक्ति के बाद परिवर्तित नहीं की जा सकती हैं । ऐसी स्थिति में लोकशिक्षण संचालनालय गौतम नगर भोपाल का संचालक लोकशिक्षण द्वारा हस्ताक्षरित जो आदेश जारी किया गया है , वह शासन संचालन एवं कार्यालय की आधिकारिक कार्यशैली तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत होना दृष्टिगत होता है।
अत: शासकीय शिक्षक संगठन ने मांग की है कि इस आदेश से मध्य प्रदेश के लगभग 150000 (डेढ लाख) से अधिक शिक्षकों में भय एवं रोष व्याप्त हो रहा है, जो कि उचित नहीं है । अतः इस तरह के आदेश को शीघ्र वापस लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश के पूर्व में दिये गये निर्णय अभी भी शासन द्वारा अमलीजामा पहनाने हेतु प्रतिक्षित हैं वहीं एक अन्य संदर्भ में दिये गए निर्णय को लेकर इतना उतावलापन समझ से परे है ।
ज्ञापन सौंपने वालों में चूरामन रैकवार पंडित राम मिलन मिश्रा डॉ राजेंद्र यादव ठाकुर शैलेंद्र सिंह गंभीरिया बलवंत यादव संजय श्रीवास्तव जी गांधली कदम धर्मेंद्र दुबे राघवेंद्र सिंह ठाकुर सुरेंद्र पराशर हरिहर मिश्रा नरेंद्र रैकवार थान सिंग मंडल अनिल चौबे प्रमोद चौबे देवरी अर्जुन सिंह पटेल केसली संजय सैनी महिला मोर्चा से श्रीमती कृष्णा साहू श्रीमती विजया मिश्रा श्रीमती संध्या साहू विभूति सीरोठिया छतरपुर श्रीमती नीता विश्वकर्मा छोटू बाबू ललित तिवारी मुकेश श्रीमती वर्षा शुक्ला राधा शर्मा अभिलाषा मिश्रा शिवम पचौरी आदि सैकड़ो की संख्या में शिक्षक उपस्थित थे।








