1 साल के बच्चे पर आय से अधिक संपत्ति का केस : जांच से नाराज हाईकोर्ट, EOW की कार्यप्रणाली पर सवाल
जबलपुर। अनुपातहीन संपत्ति के एक मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि जिस समय याचिकाकर्ता नाबालिग था, उस अवधि को जांच में शामिल करने का आधार क्या है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ ने EOW की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे अव्यवहारिक बताया। अदालत ने EOW के डीजी और विधिक सलाहकार को निर्देश दिए हैं कि वे सात दिन के भीतर पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करें। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया कानून के दायरे में और तार्किक आधार पर ही होनी चाहिए।
‘चेक पीरियड’ पर कोर्ट की आपत्ति
याचिकाकर्ता कृष्ण प्रताप सिंह चंदेल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनका जन्म वर्ष 1996 में हुआ, जबकि EOW ने 1997 से 2021 तक की अवधि को जांच का आधार बनाया है। इस हिसाब से जांच की शुरुआत के समय याचिकाकर्ता की उम्र महज एक वर्ष थी।
इस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि जब कोई व्यक्ति न तो नौकरी में था और न ही कमाई की स्थिति में, तो उस अवधि की संपत्ति को आय से अधिक कैसे माना जा सकता है।
भाई के मामले से जुड़ा पूरा प्रकरण
जानकारी के अनुसार, यह मामला याचिकाकर्ता के भाई के खिलाफ दर्ज एफआईआर से शुरू हुआ था। उनके भाई एक समिति में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे और उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे थे।
जांच के दौरान EOW ने दायरा बढ़ाते हुए परिवार के अन्य सदस्यों को भी जांच में शामिल कर लिया। इसी क्रम में याचिकाकर्ता का नाम भी जोड़ा गया और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
नौकरी से हटाए जाने पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में एक अहम पहलू यह भी सामने आया कि EOW की जांच रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ता को उनकी सरकारी सेवा से हटा दिया गया। याचिका में इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए EOW से विस्तृत जवाब तलब किया है। अब जांच एजेंसी को यह स्पष्ट करना होगा कि इतने लंबे समय को जांच अवधि में शामिल करने के पीछे उसके पास क्या ठोस तथ्य और कानूनी आधार हैं।








