एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश, हाई कोर्ट में होगी अंतिम सुनवाई
जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय दिया है। कोर्ट ने पहले से लंबित कई मामलों की स्थिति स्पष्ट करते हुए कुछ प्रकरणों को वापस मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भेजने और कुछ को अपने पास रखने का आदेश पारित किया है। इस फैसले के बाद अब इस पूरे मामले में हाई कोर्ट में अंतिम बहस का रास्ता साफ हो गया है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित सभी मामलों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करा लिया था। ये मामले सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग खंडपीठों के समक्ष लंबित थे। इनमें से कुछ मामलों की नियमित सुनवाई को लेकर ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन लगातार मांग उठा रहा था।
इस बीच, 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को वापस हाई कोर्ट भेजने का आदेश दिया था। हालांकि, इस आदेश में कुछ प्रकरण शामिल नहीं हो पाए थे, जिसे लेकर आपत्ति दर्ज की गई।
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि 19 फरवरी के आदेश में त्रुटि होने के कारण दीपक कुमार पटेल के नाम से रिव्यू याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में संशोधन किया है।
संशोधित आदेश के तहत वे 52 मामले, जो पहले ट्रांसफर सूची में शामिल नहीं हो पाए थे, अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को भेज दिए गए हैं। इसके साथ ही, दो विशेष अनुमति याचिकाएं दीपक कुमार पटेल बनाम मध्य प्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्य प्रदेश शासन को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुनवाई के लिए वापस बुला लिया है। बाकी मामलों पर 19 फरवरी का आदेश यथावत रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह ताजा आदेश 30 मार्च 2026 को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया। इस मामले में ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा।
अब सभी संबंधित मामलों की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में तय की जाएगी, जहां इस महत्वपूर्ण आरक्षण विवाद पर अंतिम निर्णय की दिशा में प्रक्रिया आगे








