आज से शुरू होगी गिद्ध गणना वन विभाग खोजेंगे आवास घोंसले पेड़ पर बैठे भी गिनेंगे

तीन दिन तक चलेगी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गिनती तेंदूखेड़ा के उप वनमंडल में सबसे ज्यादा संख्या में हैं गिद्ध
दमोह/तेंदूखेड़ा। वन विभाग के द्वारा आज से ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना आज 22 से 24 मई तक कराई जा रही है जिसमें वन विभाग का अमला गिद्ध आवास खोजेंगे वन विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया जानकारी के मुताबिक प्रदेश में गिद्ध की प्रजाति विलुप्त होती जा रही है
इसको देखते हुए वन विभाग के द्वारा गिद्ध संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे है हर साल शीतकालीन और ग्रीष्म कालीन गिद्ध गणना कराई जा रही है। शीत कालीन गिद्ध गणना 20
से 22 फरवरी तक की गई थी अब 22 से 24 मई तक ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना की जा रही है।

गिद्ध गणना का कार्य गिद्ध आंकलन एवं संरक्षण के लिए विकसित उन्नत डिजिटल मोबाइल एप गरुण के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही प्रचलित प्रपत्रों के माध्यम से भी फील्ड स्टाफ द्वारा निर्धारित तिथियों में डाटा प्रविष्टि का कार्य किया जाएगा। गिद्ध गणना के लिए प्रशिक्षित मैदानी अमला सुबह पांच बजे चिन्हित गिद्ध आवास स्थलों में पहुंचेंगे और यहां गिद्ध आवास देखेंगे और वृक्षों, चट्टानों पर बैठे गिद्ध को गणना में शामिल किया जाएगा।

उड़ते हुए गिद्ध गणना में नहीं शामिल किए जाएंगे। प्रशिक्षित अमले के द्वारा बाइनाकुलर (दूरबीन) से गिद्धों की पहचान की जाएगी और मोबाइल एप में फोटो केप्चर कर अपलोड करते हुए गिद्धों की संख्या, आवास की संख्या, गिद्धों की प्रजाति और गिद्ध मेल, फीमेल, वयस्क, अवयस्क दर्ज किए जाएंगे तेंदूखेड़ा उप मंडल के चारों रेंज तेंदूखेड़ा तेजगढ़ झलौन तारादेही में आज सुबह 5 बजे से टीम गिद्ध गणना पर निकलेगी जो
पशु चिकित्सा में दर्दनाशक दवाओं के उपयोग से विलुप्त हो गए गिद्ध
गिद्धों की आबादी में गिरावट से पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस गिरावट का प्रमुख कारण पशु चिकित्सा में उपयोग की जाने वाली गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेट्री दवा डाइक्लोफेनेक माना गया है। उपचारित पशुओं के मृत शरीर का सेवन करने पर गिद्धों में किडनी एवं आंत संबंधी गंभीर रोग उत्पहा हो जाते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। गिद्ध अत्यंत प्रभावी मुर्दाखोर पक्षी है, जो पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पशुओं के शवों का तीव्र एवं कुशलता से भक्षण कर उनसे फैलने वाली बीमारियों के प्रसार को रोकने में सहायक होते हैं। इस प्रकार पारिस्थितिकी तंत्र (ईको-सिस्टम) में गिद्धों का विशेष महत्व है
तेंदूखेड़ा उप वनमंडल अधिकारी प्रतीक दुबे ने बताया कि आज से तीन दिवसीय गिद्ध गणना शुरू हो रही है जो कि दमोह जिले के साथ ही उप मंडल के चारों ओर होगी सुबह से स्टाफ गिद्ध गणना के लिए जंगलों में पहुंचेंगे और मोबाइल एप में फोटो केप्चर कर अपलोड करते हुए गिद्धो की संख्या एवं आवास का पता लगाएंगे उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे पशुओं के इलाज में डाइक्लोफेनेक दवा का उपयोग न करें। साथ ही, मृत पशुओं के शवों में विषाक्त पदार्थ न मिलाएं, प्लास्टिक कचरे का सही निपटान करें और गिद्धों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में सहयोग करें
प्रतीक दुबे उप वनमंडल अधिकारी तेंदूखेड़ा








