चार महीने अस्पताल के बरामदे में रही महिला की मौत,सगे भाइयों का शव लेने से इनकार, लोगों ने किया अंतिम संस्कार
सागर/बीना। सिविल अस्पताल परिसर में पिछले चार महीने से रह रही 50 वर्षीय बेसहारा महिला ममता का शनिवार को निधन हो गया। अस्पताल प्रबंधन के सूचना देने के बावजूद जब उनके सगे भाइयों ने शव लेने से इनकार कर दिया, तो पुलिस और स्थानीय समाजसेवियों ने मिलकर उनका अंतिम संस्कार कराया। ममता का अपने पति से तलाक हो चुका था, जिसके बाद वह मायके बीना लौट आई थी। लेकिन भाइयों का सहारा न मिलने के कारण उन्हें बाजार और रेलवे स्टेशन के मुसाफिर खाने में रातें गुजारनी पड़ी। चार महीने पहले रेलवे अधिकारियों के दौरे के समय जीआरपी उन्हें बेसहारा पाकर सिविल अस्पताल छोड़ गई थी। तब से अस्पताल का बरामदा ही उनका ठिकाना बन गया था, जहां कर्मचारी और समाजसेवी उन्हें खाना दे दिया करते थे। शनिवार को अस्पताल परिसर में ही ममता की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर पहुंचे भाइयों ने शव लेने से साफ मना कर दिया। बीना थाना प्रभारी अनूप यादव ने परिजनों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे तैयार नहीं हुये। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम की कागजी कार्यवाही पूरी की। परिजनों के ठुकराने के बाद समाजसेवी और स्वास्थ्य सेवा संगठन से जुड़े मनीष सिंघई सहित कई लोग आगे आये। शनिवार शाम को पुलिस की मदद से ममता का अंतिम संस्कार किया गया। इस सेवा कार्य में गौ सेवा दल के सदस्य राजेंद्र यादव, रूपेश यादव, शुभम सेन, अरुण सेन, राजीव चढ़ार, सुमित राय, लक्ष्मी पंडा, बल्लू यादव, हंसराज यादव, लल्लू राम यादव, टार्जन यादव, शव वाहन चालक वीरेंद्र तिवारी और थाना प्रभारी बीना ने अपना सहयोग देकर इंसानियत का फर्ज निभाया।
चार महीने अस्पताल के बरामदे में रही महिला की मौत,सगे भाइयों का शव लेने से इनकार, लोगों ने किया अंतिम संस्कार
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by Suraj Sen
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