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नेशनल हाईवे 44 पर बढ़ते खतरे : आवारा मवेशियों के कारण कंटेनर पलटा, बाल-बाल बचे चालक और क्लीनर

मालथौन (सागर)। नेशनल हाइवे 44 ...

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मालथौन (सागर)। नेशनल हाइवे 44 पर आवारा मवेशी लगातार सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। सागर-झांसी फोरलेन मार्ग पर अक्सर सड़कों पर मवेशियों के झुंड घूमते नजर आते हैं, जिससे वाहन चालकों को हर दिन जान का खतरा बना रहता है। शासन-प्रशासन द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों और दावों के बावजूद सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है।

गायों को बचाने में पलटा कंटेनर

शुक्रवार तड़के इसी लापरवाही का नतीजा उस समय सामने आया जब बैंगलुरु से गाजियाबाद जा रहा एक कंटेनर मालथौन थाना क्षेत्र के नकटा पुल के पास हादसे का शिकार हो गया। सुबह करीब पांच बजे अचानक सड़क पर गायों का झुंड आ गया। चालक ने उन्हें टक्कर से बचाने की कोशिश की, लेकिन वाहन अनियंत्रित होकर पुल के डिवाइडर से टकरा गया और पलट गया।

इस हादसे में कंटेनर का चालक अनिल और उसका क्लीनर मामूली रूप से घायल हुए। दोनों को हल्की चोटें आईं, लेकिन वे बाल-बाल बच गए। वहीं, चालक की सूझबूझ से मवेशियों की जान भी बच गई।

हादसे के बाद ट्रैफिक बाधित

कंटेनर के पलटने से एनएच-44 पर एक लेन पूरी तरह से बंद हो गई और सड़क कुछ समय के लिए वन-वे हो गई। इसके कारण दिनभर वाहनों को गलत साइड से निकालना पड़ा, जिससे लंबी ट्रैफिक लाइनें लग गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में रोजाना मवेशियों का झुंड सड़क पर दिखाई देता है, जिसके कारण आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं।

प्रशासनिक दावे बने कागजी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और नगर निकायों द्वारा आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने के कई दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती। सागर से लेकर ललितपुर तक फोरलेन सड़क के कई हिस्सों में गायें, बैल और अन्य मवेशी बेखौफ घूमते रहते हैं।

लोगों ने मांग की है कि एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान करें ताकि यात्रियों की जान पर मंडराता खतरा खत्म हो सके।

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