आरटीआई कानून दम तोड़ रहा ? पंचायत सचिव पर नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप
बमनौदा ग्राम पंचायत में नियमों की उड़ रही धज्जियां पंचायत सचिव द्वारा आरटीआई के तहत नहीं दे रहे जानकारी अधिकारी भी हुए मौन
दम तोड़ रहा है आरटीआई कानून – दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बमनौदा में समय सीमा के बाद भी नहीं दी गई जानकारी जनपद के अधिकारी भी कर रहे गुमराह
तेंदूखेड़ा। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लागू किया गया था यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा हथियार माना जाता रहा है इस अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी विभाग से जानकारी प्राप्त कर सकता है लेकिन ग्राम पंचायत बमनौदा में पदस्थ सचिव भूपत यादव इस अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए नजर आ रहे हैं दरअसल
सूचना का अधिकार आरटीआई अधिनियम जो कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने और जनता को जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया है जो तेंदूखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायतों में निष्क्रिय होता दिख रहा है ऐसा ही ताजा मामला ब्लॉक की ग्राम पंचायत बमनौदा का है जहां आवेदक को समय सीमा के भीतर जानकारी नहीं दी गई है दरअसल तेंदूखेड़ा निवासी विशाल रजक ने 22 अप्रैल 2026 को पंचायत सचिव और लोक सूचना अधिकारी को एक आरटीआई आवेदन देकर पंचायत में किए गए कार्यों की जानकारी मांगी थी अधिनियम के तहत 30 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला जानकारी न मिलने के बाद विशाल रजक ने जनपद सीईओ तेंदूखेड़ा के पास अपील दायर कर बमनौदा पंचायत के सचिव भूपत यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि तेंदूखेड़ा जनपद में आरटीआई अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और पूरा प्रशासन इस कानून को लागू करने में असफल साबित हो रहा है विशाल रजक का कहना है कि कलेक्टर और संभागीय आयुक्त को जनपद सीईओ को आरटीआई अधिनियम का उचित ज्ञान देना चाहिए ताकि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को इस कानून का पालन सुनिश्चित करवा सकें
जानकारी देने से खुल सकते हैं कई भ्रष्टाचार के मामले
ग्राम पंचायत बमनौदा के सचिव द्वारा आवेदक को लगातार परेशान किया जा रहा है साथ ही जनपद के अधिकारियों द्वारा आवेदक को समय सीमा खत्म होने के बाद भी जानकारी नहीं दी जा रही है कहीं न कहीं इसमें जनपद के अधिकारियों का खुला संरक्षण है जिसके कारण नियम अनुसार प्रथम अपील करने के बाद में आवदेक को गुमराह कर परेशान किया जा रहा है अगर पंचायत सचिव जानकारी देते हैं तो कई भ्रष्टाचार और गबन के खुलासे हो सकते हैं सूत्रों द्वारा खबर है पंचायत में जमकर सरकारी राशि में गड़बड़ी एवं फर्जी बिलों के नाम पर भुगतान किया जा रहा है जिसके कारण पंचायत सचिव जानकारी देने से कतरा रहे हैं और आवदेक को परेशान किया जा रहा है
जनता की मांगः पारदर्शिता और जिम्मेदारी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सूचना के अधिकार का सही ढंग से पालन नहीं किया गया तो यह कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए ताकि आम जनता को न्याय मिल सके। इस मामले ने एक बार फिर से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन और जनपद सीईओ पर टिकी हैं कि वे जनता के अधिकारों की रक्षा करने में क्या भूमिका निभाते हैं








