85 साल के बुजुर्ग की बहादुरी: तेंदुए के जबड़े से खुद को छुड़ाया, लाठियों से पीटकर जंगली दरिंदे को भागने पर किया मजबूर
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से साहस और जीवटता की एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां के पवई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नारदपुर गांव में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस के बल पर साक्षात मौत को मात दे दी। मंगलवार दोपहर जब एक खूंखार तेंदुए ने उन पर हमला किया, तो भागने के बजाय बुजुर्ग उससे भिड़ गए और लाठियों से पीटकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
भैंस की तलाश में गए थे जंगल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दक्षिण वनमंडल पन्ना की चोपरा बीट स्थित नारदपुर निवासी अर्जुन सिंह (85) की एक भैंस बीते सोमवार से लापता थी। अपनी पालतू भैंस को तलाशते हुए अर्जुन सिंह मंगलवार दोपहर गांव से सटे घने जंगल की ओर निकल गए थे। वह झाड़ियों के बीच अपनी भैंस को ढूंढ ही रहे थे कि तभी वहां पहले से घात लगाकर बैठे एक पूर्ण विकसित तेंदुए ने अचानक उन पर हमला बोल दिया।
हाथ से पकड़ा कान, दूसरे हाथ से भांजी लाठी
प्रत्यक्षदर्शियों और प्राप्त विवरणों के मुताबिक, तेंदुए ने सीधे अर्जुन सिंह की गर्दन को अपने जबड़ों में फंसाने की कोशिश की। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भी अर्जुन सिंह ने गजब की फुर्ती दिखाई। उन्होंने अपनी गर्दन बचाते हुए एक हाथ से तेंदुए का कान मजबूती से पकड़ लिया और दूसरे हाथ में थामी अपनी लाठी से उसकी पीठ पर ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिए।
चीख पुकार सुनकर भागा तेंदुआ
बुजुर्ग ने हार मानने के बजाय पूरी ताकत से शोर मचाना शुरू किया और तेंदुए पर वार करना जारी रखा। एक निहत्थे बुजुर्ग का ऐसा आक्रामक रूप देख तेंदुआ सहम गया। संघर्ष के कुछ ही मिनटों बाद जंगली जानवर अपनी पकड़ ढीली कर जंगल की गहराइयों में वापस भाग खड़ा हुआ।
अस्पताल में उपचार जारी
इस खूनी संघर्ष में अर्जुन सिंह पूरी तरह सुरक्षित तो नहीं रह पाए, उनके हाथ और गर्दन पर तेंदुए के नाखूनों और दांतों के गहरे घाव आए हैं। घटना के तुरंत बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पवई ले जाया गया। वहां प्राथमिक सहायता देने के बाद उनकी गंभीर स्थिति और बेहतर इलाज की आवश्यकता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल पन्ना के लिए रेफर कर दिया है। फिलहाल बुजुर्ग की हालत स्थिर बनी हुई है और इलाके में उनकी इस दिलेरी की हर कोई चर्चा कर रहा है।








