नई योजनाओं की चकाचौंध या कर्ज का बढ़ता बोझ ? क्या है देश की असली आर्थिक तस्वीर !
Hamara Bharat : सरकार आए दिन नई-नई योजनाओं का ऐलान कर रही है, लेकिन क्या इन लुभावनी योजनाओं के पीछे देश की असली आर्थिक स्थिति छिप रही है? बड़ा सवाल यह है कि नई योजनाओं पर ध्यान देने के बजाय, अगर सरकार सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की आमदनी को मजबूत करने पर फोकस करे, तो शायद जनता को किसी योजना या सहारे की जरूरत ही ना पड़े।
वर्तमान आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति सोचने पर मजबूर कर देती है। आज की तारीख में देश पर लगभग 200 लाख करोड़ रुपये (आंतरिक और बाहरी ऋण मिलाकर) का भारी-भरकम कर्ज है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि ऐसी योजनाओं का आखिर क्या फायदा, जिनका वित्तीय बोझ अंततः देश को कर्ज की गहरी खाई में धकेल रहा हो? योजनाएं जनता की भलाई के लिए होनी चाहिए, न कि भविष्य में उनके लिए कर्ज का एक ऐसा पहाड़ खड़ा करने के लिए जिसका ब्याज चुकाते-चुकाते अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाए।
क्या हम वास्तव में विकास कर रहे हैं, या सिर्फ कर्ज के सहारे आगे बढ़ने का भ्रम पाल रहे हैं? इस पर विचार करना बेहद जरूरी है।








