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छांव को तरस रही जिंदगी: पेड़ों की कटाई ने बढ़ाई गर्मी और चिंता

छांव को तरस रहे लोग ...

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छांव को तरस रहे लोग नहीं समझ रहे वृक्षों का महत्व

पर्यावरण में दे सार्थक योगदान – नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा जीवन में एक वृक्ष जरुर लगाए संरक्षण के लिए करें जागरूक

रिपोर्ट – विशाल रजक

तेंदूखेड़ा। पर्यावरण को संरक्षित रखने में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है यदि पेड़ पौधे कम होते रहे तो ऑक्सीजन की कमी के साथ ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी बढ़ेगी बिगड़ते पर्यावरण संतुलन के कारण वैसे भी हम कई समस्याओं से जूझ रहे हैं कभी जिले में अनेक छायादार व फलदार जहां गांव-शहर के सौंदर्य को बढ़ाते थे, वहीं राहगीरों को इनसे फल व छाया मिलती थी। आज वृक्षों की घटती संख्या के कारण लोग चिलचिलाती गर्मी में छांव तक को तरस गए हैं सरकारी दफ्तरों, कॉलोनियों, सडकों व हाइवे पर यदि किसी राहगीर को वृक्ष की छांव मिल जाती है तो वे कुछ देर उसके नीचे सुकून की सांस लेते हैं बीते दिवस तेजगढ़ मार्ग पर उस वक्त वृक्ष की अहमियत का अहसाज हुआ जब कुछ लोग धूप से बचने के लिए उसकी छांव का सहारा ले रहे थे। इस संबंध में हमने नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों से चर्चा कर जाना कि हम पर्यावरण के लिए कैसे अपना योगदान दे सकते हैं। वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए किस तरह की भूमिका निभा सकते हैं। जिसके उन्होंने रोचक जवाब देते हुए अधिक से अधिक पौधों के रोपण व उनकी देखभाल की जरूरत बताई

अंधाधुंध दोहन का नतीजा है बढ़ता तापमान

पंडित विनीत मिश्रा कहते है कि निरंतर घटता जंगल और भूजल स्तर उसके साथ बढ़ता तापमान प्रकृति के अंधाधुंध दोहन का नतीजा है। इसके साथ ही खेतों में जैविक खाद के स्थान पर रसायन का भारी प्रयोग स्थित को विकट कर रहा है। इन्ही सब बातों को लेकर समाज को जागृत होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण जरूरी, तभी सुरक्षित रहेगी भावी पीढ़ी, जीवन में हर व्यक्ति एक पौधा जरूर लगाएं। पौधे लगाने से गर्मी में छाया होती है फल फूल मिलते है, हर इंसान को कम से कम एक पौधा अपने जीवन में लगाकर उसकी देखरेख करना चाहिए। अन्य लोगों को भी इस हेतु प्रेरित करें

पंडित विनीत मिश्रा अधिवक्ता तेंदूखेड़ा

अपने जन्मदिवस पर एक पौधा जरूर लगाएं
सेवानिवृत्त एसडीओ बीएल साहू ने कहा कि हम सभी को एक संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जन्मदिवस पर एक पौधे का रोपण जरूर करेंगे। वनों की कटाई, जैव विविधता का नुकसान, वायु प्रदूषण, जहरीले रसायनों के प्रवाह की वजह से नदियों में प्रदूषण, अपशिष्ट पदार्थ, कचरा, प्लास्टिक, ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन परत का कमजोर होना, भूमिगत जल, तेल, गैस भंडार और प्राकृतिक संसाधन जैसे खनिजों का दूषित होना, जहरीले गैसों का विकास, हवा में प्रदूषण, धुंध आदि का बढ़ना चिंतनीय है। इससे निबटने के लिए भी आवश्यक उपाय जरूरी है। प्रशासन को भी इस दिशा में सख्ती दिखानी चाहिए। ताकि पर्यावरण बचा रहे

बीएल साहू सेवानिवृत्त एसडीओ तेंदूखेड़ा

मार्गों में भी कम हुई वृक्षों की छांव
भागीरथ रजक कहना है कि पेड़-पौधों की कमी से आक्सीजन की कमी होती चली जाएगी, जिससे जीना तक दूभर हो जाएगा। ऐसे में पेड़ पौधे जीवन को बचाने में ही नहीं अपितु पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी अहम रोल अदा कर रहे हैं अगर पेड़ पौधे कम हो जाएंगे तो पक्षियों का आश्रय स्थल कम होता चला जाएगा। यही कारण है कि वनों की कटाई के चलते जीव-जंतु कम होते चले जाएंगे। आहार श्रृंखला में भी पेड़ पौधों की भूमिका कम नहीं है। गांव व शहर के मार्गों में कभी बड़ी संख्या में छायादार वृक्ष होते थे। जो राहगीरों को कुछ पल की राहत देते थे। इनका लगातार घटना चिंता का विषय है

भागीरथ रजक अध्यक्ष रजक समाज तेंदूखेड़ा

वृक्ष हमारे सच्चे और निःस्वार्थ मित्र
वरिष्ठ समाजसेवी पंडित रमेश तिवारी का मानना है कि वृक्ष हमारे पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के साथ मित्र भी हैं, क्योंकि सच्चे मित्र की मित्रता ही निस्वार्थ होती है। ऐसी ही पेड़-पौधे होते हैं। वे निस्वार्थ रूप से हमको ऑक्सीजन, फल, लकड़ी देते हैं। इन्हें बचाए रखने का हम लोगों का परम कर्तव्य है। वृक्ष से ही समय पर वर्षा होती है जो कृषि कार्यों में सहायक होती है आज के युवाओं को चाहिए कि वह पर्यावरण के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। जीवन में एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी वृक्ष बनने तक देखरेख करें। शासकीय तंत्र को भी बढ़ते पर्यावरण असंतुलन को गंभीरता से लेकर आवश्यक उपाय करना चाहिए वरना परिणाम भयावह होंगे

पंडित रमेश तिवारी तेंदूखेड़ा

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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