बंडा। विनायका थाना क्षेत्र के ग्राम रोड़ा में जुलाई 2025 में अपनी 50 वर्षीय मां की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी को बंडा न्यायालय द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने बुधवार को प्रकरण में फैसला सुनाते हुये अपराध को जघन्यतम श्रेणी का मानते हुये आरोपी को दोषसिद्ध किया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया द्वारा पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग की गई तथा विवेचना, साक्ष्य संकलन एवं न्यायालयीन कार्यवाही के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। एएसपी जयवीर सिंह भदौरिया एवं नरेन्द्र सोलंकी द्वारा भी प्रकरण को प्राथमिकता पर लेते हुये इसकी लगातार समीक्षा की गई, जिससे महत्वपूर्ण गवाहों एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों का समय पर संकलन कर न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सका। प्रकरण की विवेचना थाना प्रभारी विनायका उप निरीक्षक भूपेंद्र विश्वकर्मा द्वारा स्वयं की गई। उन्होंने घटनास्थल से भौतिक एवं वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित करने, आरोपी की गिरफ्तारी तथा प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करने के लिये लगातार प्रभावी कार्रवाई की। विवेचना के दौरान मृतिका के शरीर पर मिले महत्वपूर्ण जैविक साक्ष्य से आरोपी का डीएनए मैच हुआ तथा घटनास्थल से प्राप्त फिंगर प्रिंट भी आरोपी से मैच हुये। इन महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों ने प्रकरण को मजबूत आधार प्रदान किया। प्रकरण में मृतिका के पति एवं आरोपी के पिता ही फरियादी थे। न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान फरियादी द्वारा आरोपी के पक्ष में बयान दिये जाने के बावजूद पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान संकलित वैज्ञानिक एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना मामला मजबूती से प्रस्तुत किया। डीएनए एवं फिंगर प्रिंट जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों सहित अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अपराध प्रमाणित हुआ। घटना 19-20 जुलाई 2025 की दरम्यानी रात ग्राम रोड़ा की है। मृतिका का पति अपनी बेटी को लेने छतरपुर गया था। घर पर उसकी पत्नी और इकलौता बेटा मौजूद थे। 20 जुलाई को पति के वापस लौटने पर पत्नी का लहूलुहान शव घर में मिला, जबकि घटना के बाद से संतोष घर से फरार था। विनायका पुलिस द्वारा तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण कर महत्वपूर्ण भौतिक एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किये गये। विवेचना में सामने आया कि आरोपी ने अपनी मां के साथ गलत काम करने का प्रयास किया, जिसका विरोध करने पर उसने पत्थर एवं कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी इंदौर भाग गया था, जिसे पुलिस द्वारा बांदरी.मालथौन रोड से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद से आरोपी बंडा उपजेल में निरुद्ध था। प्रकरण में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी संजय पटेल द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। वही कोर्ट मुंशी सोमेश मिश्रा एवं चंद्रकांत पांडेय द्वारा गवाहों की समय पर पेशी एवं फास्ट ट्रायल में महत्वपूर्ण सहयोग किया गया। पुलिस की प्रभावी विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन, वरिष्ठ अधिकारियों की सतत मॉनिटरिंग तथा अभियोजन की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप जघन्य अपराध के आरोपी को न्यायालय द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
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