मैं छोटी हूं लेकिन कमजोर नहीं…. अब मुझे मेरे जंगल वापस भेज दो
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मां से बिछड़ी 20 माह की बाघिन अब पूरी तरह स्वस्थ इलाज पूरा वापसी का इंतजार
इलाज में मिली नई जिंदगी अब सरकारी दफ्तर में अटकी बाघिन की आजादी की फाइल*
विशाल रजक तेंदूखेड़ा/सागर/जबलपुर। मैं छोटी हूं… लेकिन कमजोर नहीं। मेरी दहाड़ लौट आई है। जिस जंगल से मुझे लाया गया था, अब वहीं लौटना है मुझे फिर जंगल की हवा महसूस करने दो… यह बाघिन की कही हुई बात नहीं, लेकिन उसकी मौजूदा स्थिति शायद यही कहानी कहती है
करीब दो माह पहले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से मां से अलग होकर बेहद कमजोर हालत में मिली 20 माह की बाघिन को जबलपुर में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के वन्यजीव चिकित्सा केंद्र भेजा गया था जहां उसका इलाज और लगातार निगरानी के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है लेकिन अस्पताल से जंगल तक उसका सफर अभी पूरा नहीं हुआ है। करीब 10 दिन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने वन विभाग को पत्र भेजकर बाघिन के स्वस्थ होने की सूचना दी और उसे ले जाने के लिए कहा। इसके बाद से
विश्वविद्यालय जबलपुर को विभाग के जवाब का इंतजार है बाघिन फिलहाल उसी चिकित्सा केंद्र में है, जहां पिछले करीब दो माह से विशेषज्ञ उसकी सेहत पर नजर रख रहे हैं
*अब सवाल सिर्फ इलाज का नहीं, जंगल में वापसी का*
स्वस्थ होने के बाद भी बाघिन को सीधे जंगल में छोड़ देना आसान फैसला नहीं होगा करीब दो माह वन क्षेत्र से बाहर रहने के बाद उसके प्राकृतिक व्यवहार, शिकार करने की क्षमता, भोजन तलाशने और जंगल में खुद को सुरक्षित रखने की क्षमता का आकलन जरूरी होगा
वन विभाग को यह भी तय करना होगा कि उसे वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वापस छोड़ा जाए, जहां से उसका रेस्क्यू किया गया था या आगे की प्रक्रिया के लिए किसी उपयुक्त स्थान पर भेजा जाए विवि प्रशासन का कहना है कि बाघिन अब चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ है और उसे लंबे समय तक चिकित्सा केंद्र में रखने का कोई चिकित्सकीय कारण नहीं है इसी आधार पर करीब 10 दिन पहले वन विभाग को पत्र भेजकर उसे ले जाने की सूचना दी गई। फिलहाल सेंटर में उसकी नियमित निगरानी की जा रही है
*टाइगर रिजर्व में गंभीर हालत में मिली थी बाघिन*
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही अभयारण्य ) से इस बाघिन को गंभीर हालत में रेस्क्यू कर जबलपुर स्थित एसडब्ल्यूएफएचएस सेंटर 9 जुलाई को भेजा गया था। बाघिन की उम्र डेढ़ साल की थी। बाधिन अपने परिवार से बिछड़कर जंगल में अकेली भटक गई थी। लंबे समय तक भोजन और पानी नहीं मिलने के कारण वह कमजोर हो गई थी जिससे भोजन करने में असमर्थ थी। गश्त के दौरान बीट गार्ड को यह बाघिन गंभीर स्थिति में मिली थी। वन विभाग ने बाघिन का रेस्क्यू कर उसे उपचार के लिए वाइल्डलाइफ हेल्थ सेंटर जबलपुर पहुंचाया था अब वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है
*मुख्यालय से मांगा मार्गदर्शन*
जबलपुर से वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र के निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि बाधिन के उपचार और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल मुख्यालय को भेज दी गई है पीसीसीएफ कार्यालय से विधिवत अनुमति आदेश मिलने के बाद ही उसे नौरादेही अभयारण्य वापस भेजा जा सकेगा
*अभी भी पिंजरे में कैद है बाघिन*
केंद्र निदेशक डॉ. आरके शर्मा के अनुसार मुख्यालय को लिखित रिपोर्ट भेजकर तत्काल मार्गदर्शन मांगा गया है, ताकि पिंजरे में लंबी कैद के कारण उत्पन्न होने वाले
गंभीर जैविक जोखिमों से इसे सुरक्षित रखा जा सके
डाक्टरों की टीम ने रोजाना के खान-पान, रक्त जांच और शारीरिक गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी गई है जिसके सकारात्मक परिणाम स्वरूप यह पूरी तरह निरोग हो सकी। अपनी कठिन तपस्या को सफल देख अब पूरा चिकित्सा अमला चाहता है कि बाघिन अपनी मूल दुनिया यानी खुले जंगल में सम्मानपूर्वक विदा हो जाए








