वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दीपावली तक दो और अफ्रीकन चीतों की होगी आमद, चार होगा चीतों का कुनबा
कूनो नेशनल पार्क से शिफ्ट किए जाएंगे दोनों चीते, सीएम डॉ. मोहन यादव ने 7 अक्टूबर को की थी घोषणा
रिपोर्ट – विशाल रजक
तेंदूखेड़ा। प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) के लिए एक और अच्छी खबर है। दीपावली तक यहां दो और अफ्रीकन चीतों को लाने की तैयारी जोरों पर है। इन दो नए मेहमानों के आने के बाद रिजर्व में चीतों की संख्या दो से बढ़कर चार हो जाएगी और चीतों का कुनबा और बड़ा हो जाएगा उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 अक्टूबर को वीडीटीआर की मोहली रेंज में कूनो नेशनल पार्क से लाए गए दो चीतों – नर थोलो और मादा सीसीबी-3 को सॉफ्ट रिलीज बोमा में रिलीज किया था। इसी दौरान उन्होंने मंच से घोषणा की थी कि एक महीने के अंदर वीडीटीआर में दो और चीते शिफ्ट किए जाएंगे। अब वन विभाग ने इस दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नए चीते भी कूनो नेशनल पार्क से ही लाए जाएंगे, जहां वर्तमान में चीतों की संख्या 30 से अधिक हो गई है।
439 हेक्टेयर के विशाल बोमा में रखा जाएगा
वीडीटीआर की मोहली रेंज में छोटी घास का विशाल प्राकृतिक मैदान है, जो चीतों के रहवास के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यहीं पर करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में पांच अलग-अलग हिस्सों वाला अत्याधुनिक सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाया गया है। वर्तमान में थोलो और सीसीबी-3 इसी बोमा में विचरण कर रहे हैं। नए आने वाले दोनों चीतों को भी पहले इसी बोमा में रखा जाएगा, ताकि वे यहां के वातावरण के आदी हो सकें। हालांकि वीडीटीआर प्रबंधन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पहले से मौजूद दोनों चीतों को बोमा से निकालकर खुले जंगल में कब छोड़ा जाएगा
बॉक्स: चीतों की सुरक्षा और आवास की खास बातें*
– *सॉफ्ट रिलीज बोमा: चीतों को सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय करीब 439 हेक्टेयर के विशेष रूप से तैयार बोमा में रखा गया है। इसे पांच अलग-अलग हिस्सों में बनाया गया है।
– *बाड़ों की ऊंचाई और तकनीक:* सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक से लैस बाड़े बनाए गए हैं। सॉफ्ट रिलीज बाड़े की ऊंचाई करीब 14 फीट और क्वारेंटीन बाड़े की ऊंचाई करीब 10 फीट रखी गई है।
– *इलेक्ट्रिक फेंसिंग:* बाड़ों के ऊपरी हिस्से और चारों तरफ 6 लेयर वाले इलेक्ट्रिक पल्स तार और पावर फेंसिंग लगाई गई है।
– *24 घंटे निगरानी:* चीतों की ट्रैकिंग, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 24×7 निगरानी तंत्र, सीसीटीवी और पशु चिकित्सा दल तैनात है।
बाघों का कुनबा भी लगातार बढ़ रहा है
वीडीटीआर में केवल चीतों ही नहीं, बाघों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। बीते दिनों ही रिजर्व में एक मादा बाघ अपने 3 नए शावकों के साथ ट्रैप कैमरे में कैद हुई थी। इससे पहले तक रिजर्व में बाघों की संख्या 30 से 32 के बीच मानी जा रही थी, जो अब बढ़कर 34 से 35 तक पहुंच गई है। गौरतलब है कि क्षेत्रफल की दृष्टि से वीडीटीआर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है और चीतों की बसाहट के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है
93 गांवों में से 40 का विस्थापन अब भी शेष, 150 करोड़ खर्च फिर भी काम अधूरा
वीडीटीआर की सबसे बड़ी चुनौती यहां बसे गांवों का विस्थापन है। रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र में कुल 93 गांव बसे हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनमें से अब तक केवल 28 गांवों का ही पूर्ण विस्थापन हो पाया है। 25 गांवों में विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है, जबकि 40 गांवों में अभी तक प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़ दशक में विस्थापन के नाम पर वन विभाग 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है, इसके बावजूद लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव और वन्यजीवों से संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है।
*कूनो में अलग फील्ड डायरेक्टर, वीडीटीआर में व्यवस्था नहीं, 22 दिन से कोई अपडेट नहीं*
चीता प्रोजेक्ट को लेकर शासन के रवैये पर भी सवाल उठ रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के लिए शासन ने अलग से फील्ड डायरेक्टर की तैनाती की है। जैसे ही कूनो में चीतों की बसाहट शुरू हुई, तभी से प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी अलग फील्ड डायरेक्टर को सौंपी गई। वर्तमान में कूनो में उत्तम शर्मा फील्ड डायरेक्टर के रूप में चीता प्रोजेक्ट की कमान संभाल रहे हैं और हर दिन चीतों की अपडेट जारी की जाती है इसके उलट वीडीटीआर में चीतों के लिए अलग से कोई अधिकारी या फील्ड डायरेक्टर तैनात नहीं किया गया है। मौजूदा टाइगर रिजर्व प्रबंधन के भरोसे ही चीता प्रोजेक्ट चल रहा है। यही कारण है कि 7 अक्टूबर को दो चीते लाए जाने के बाद पिछले 22 दिनों से वीडीटीआर प्रबंधन की ओर से चीतों की सेहत, उनकी गतिविधि, खान-पान और लोकेशन को लेकर कोई भी आधिकारिक प्रेस नोट या अपडेट जारी नहीं किया गया है। इससे वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में निराशा है








